नवाज और बेनजीर के बाद अब इमरान का नंबर? पाकिस्तान के विपक्षी नेता ने किया पूर्व पीएम को देश से निकालने का दावा
पाकिस्तानी विपक्षी नेता महमूद खान अचकजई ने दावा किया है कि जेल में बंद इमरान खान पर नवाज शरीफ और ...और पढ़ें

पाकिस्तान में विपक्ष के नेता ने किया बड़ा दावा।
HighLights
इमरान खान पर निर्वासन समझौते का दबाव होने का दावा।
नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के निर्वासन से तुलना की गई।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन को अदालत में चुनौती दी गई।
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विपक्षी नेता महमूद खान अचकजई ने दावा किया है कि जेल में बंद पीटीआई के चीफ और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर एक ऐसे समझौते के लिए दबाव डाला जा रहा है जो नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के निर्वासन (देश से बाहर रहने) का कारण बना था।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पख्तूनख्वा मिली अवामी पार्टी (PkMAP) के अध्यक्ष और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता अचकजई ने शुक्रवार को पेशावर हाई कोर्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह दावा किया।
अचकजई ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) भी इसी तरह की राजनीतिक व्यवस्था में शामिल हैं। अचकजई ने कहा, "आज जब पीएमएल-एन और पीपीपी सत्ता में हैं, तो ठीक वैसा ही हो रहा है।"
अचकजई के साथ तहरीक-ए-तहफुज-ए-आईन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेता सरदार अख्तर मेंगल और अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं और जल्द ही एक सर्वदलीय सम्मेलन बुलाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभाओं से इस्तीफा देना अभी भी एक विकल्प है। उन्होंने बताया कि बातचीत के प्रस्ताव के जवाब में विपक्ष ने अपनी मांगें सौंप दी हैं।
यह दावा ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान जेल में हैं और राजनीतिक गतिविधियों तथा चुनी हुई संस्थाओं के कामकाज पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाए हैं।
क्या है नवाज और बेनजीर के निर्वासन का मामला?
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अचकजई की टिप्पणी उन परिस्थितियों की ओर इशारा करती है, जिनमें पाकिस्तान के दो सबसे प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो राजनीतिक उथल-पुथल के बाद देश से बाहर रहे थे।
तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद शरीफ को सत्ता से हटा दिया गया और जेल में डाल दिया गया। सऊदी और लेबनानी नेताओं की मध्यस्थता से हुए एक समझौते के तहत वह साल 2000 में पाकिस्तान छोड़कर चले गए।
इस बीच 1997 के आम चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की हार और तत्कालीन राष्ट्रपति फारूक लेघारी द्वारा हटाए जाने के बाद भुट्टो खुद ही निर्वासन में चली गईं। उनके पति आसिफ अली जरदारी को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में डाल दिया गया था और उन्हें 2004 में रिहा किया गया।
अचकजई की बातों से ऐसा लगता है कि इमरान खान के मामले में भी कुछ ऐसा ही समझौता किया जा सकता है। हालांकि, डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उनके बयानों से यह साबित नहीं होता कि पीटीआई संस्थापक को लेकर कोई निर्वासन समझौता हो गया है या होने जा रहा है।
अचकजई ने क्या मांग की?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचकजई ने कैदियों की मुलाकातों पर लगी पाबंदियों की आलोचना की और एक ऐसे बदलाव की मांग की जिसे उन्होंने गलत संशोधन बताया। उन्होंने संसद को और अधिक अधिकार देने और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाने की भी मांग की।
उन्होंने कहा, "दुनिया में कहीं भी कैदियों को लोगों से मिलने से नहीं रोका जाता है।" उन्होंने तर्क दिया कि संसद को मजबूत किए बिना राजनीतिक विवादों को हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और अन्य विधायकों के ठिकाने को लेकर भी चिंता जताई और अधिकारियों से मुख्यमंत्री के स्थान का खुलासा करने की मांग की।
उन्होंने कहा, "हम खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के साथ खड़े हैं। इस प्रांत के खनिजों पर यहां के लोगों का पहला अधिकार है। राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर सभी को अपनी मातृभूमि के लिए एकजुट होना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि अगर देश सुरक्षित रहेगा, तभी वे भी सुरक्षित रह पाएंगे।
अचकजई के साथ आए मेंगल ने खैबर पख्तूनख्वा में सरकार के कदमों की आलोचना की और आतंकवाद के आधार पर वहां गवर्नर शासन लागू करने पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुने हुए प्रतिनिधियों को हटा दिया गया है और उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था की वैधता पर सवाल उठाए।
सीनेट में विपक्ष के नेता राजा नासिर अब्बास ने भी मौजूदा हालात की आलोचना करते हुए कहा, "आपसे देश तो संभल नहीं रहा, फिर भी आपने एक प्रांत पर कब्जा कर रखा है।"
विपक्ष ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन को दी चुनौती
इसके अलावा, शुक्रवार को टीटीएपी नेताओं ने पेशावर उच्च न्यायालय का रुख किया और आपातकाल की घोषणा तथा खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से 11 अक्टूबर की उस घोषणा को असंवैधानिक और कानूनी अधिकार से रहित घोषित करने की मांग की, जिसे पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234 के तहत जारी किया गया था।
उन्होंने तर्क दिया कि इन उपायों को लागू करने के लिए जरूरी संवैधानिक शर्तें पूरी नहीं की गई थीं या फिर सरकार ने अपनी शक्तियों का हद से ज्यादा इस्तेमाल किया था।
याचिका में प्रांतीय विधानसभा की विधायी शक्तियों को संसद को सौंपने, निर्वाचित मुख्यमंत्री और प्रांतीय मंत्रिमंडल को हटाए जाने तथा प्रस्तावित खैबर पख्तूनख्वा सलाहकार परिषद और क्षेत्र विकास सचिवालय के गठन को भी चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं ने इस घोषणा से जुड़े कार्यकारी आदेशों और अधिसूचनाओं को रद करने की मांग की है। इसमें सशस्त्र बलों की तैनाती भी शामिल है, जिसके बारे में कहा गया है कि यह संवैधानिक आवश्यकताओं का उल्लंघन करती है।
उन्होंने अदालत से अंतरिम राहत की भी मांग की है, ताकि जब तक अदालत इस मामले पर विचार कर रही है तब तक निर्वाचित संस्थाओं को हटाए जाने और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर पाबंदियां लगाने से रोका जा सके।
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