विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आसिम मुनीर की गुप्त योजना, क्या खत्म हो जाएगा पाकिस्तान में नागरिक सरकार का अस्तित्व?

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:53 PM (IST)

ये किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान में सत्ता असल में किसके पास होती है। पाकिस्तान में असली सत्ता ...और पढ़ें

क्या खत्म हो जाएगा पाकिस्तान में नागरिक सरकार का अस्तित्व

क्या खत्म हो जाएगा पाकिस्तान में नागरिक सरकार का अस्तित्व

HighLights

  1. चार प्रांतों को तोड़कर 12 से 15 छोटे प्रांत बनाने पर हो रहा विचार

  2. फूट डालो और राज करो की सियासत पर काम रहे हैं आसिम मुनीर

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। ये किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान में सत्ता असल में किसके पास होती है। पाकिस्तान में असली सत्ता सेना प्रमुख के पास है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कथित तौर पर देश के राजनीतिक नक्शे को फिर से बनाने पर विचार कर रहे हैं।

द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, वे चार प्रांतों को तोड़कर 12 से 15 छोटे प्रांत या 160 प्रशासनिक इकाइयां बनाने का प्रस्ताव सोच रहे हैं। छोटे इकाइयों को शासन में आसान बताया जा रहा है, लेकिन सवाल है कि क्या ये सैन्य नियंत्रण को भी आसान बना देंगी।

प्रस्ताव अभी अपुष्ट है। पंजाब और सिंध जैसे ताकतवर राजनीतिक गढ़ों को विभाजित करने से स्थापित दल कमजोर हो सकते हैं और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण बदल सकता है।

द इकोनॉमिस्ट ने इसे फूट डालो और राज करो की रणनीति बताया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति केंद्र कमजोर होंगे और सैन्य-समर्थित संघीय सरकार के लिए प्रबंधन आसान हो जाएगा। छोटे इकाइयां सेवाएं सुधार सकती हैं, लेकिन शक्ति मुनीर और सेना के हाथ में केंद्रित भी हो सकती है।

पंजाब पीएमएल-एन (शरीफ परिवार) और सिंध पीपीपी (भुट्टो-जरदारी परिवार) का गढ़ है। दक्षिण पंजाब अलग प्रांत बनाने का प्रस्ताव पुराना है, लेकिन विभाजन से शरीफों का आधार कमजोर होगा। सिंध असेंबली ने सितंबर में विभाजन का विरोध किया और अक्टूबर में बहुदलीय सम्मेलन ने भी विरोध दर्ज किया।

बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में खनिज संपदा है। प्रांतीय सरकारों को कमजोर करने से संघीय प्रतिष्ठान को खनन परियोजनाओं में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाकर पीटीआई सरकार निलंबित कर दी गई।

संविधान के अनुच्छेद 239 के तहत प्रांतीय सीमा बदलने के लिए संसद और प्रांतीय असेंबली में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। सिंध में विरोध पहले से है। समर्थक शासन सुधार की बात करते हैं, आलोचक डरते हैं कि इससे नागरिक सरकारें कमजोर होंगी और इस्लामाबाद पर निर्भरता बढ़ेगी।