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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

IMF ने पाकिस्तान को दिया 1 बिलियन डॉलर का लोन, भारत क्यों नहीं कर पाया पैकेज के खिलाफ वोट; जानिए क्या है कारण

Published: Sat, 10 May 2025 09:07 AM (IST)

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है और इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को ...और पढ़ें

भारत ने आईएमएफ के लोन का किया विरोध (फाइल फोटो)
भारत ने आईएमएफ के लोन का किया विरोध (फाइल फोटो)

HighLights

  1. IMF से पक को मिले लोन का भारत ने किया विरोध
  2. IMF की वोटिंग में 'नहीं' कहने का नहीं है कोई प्रावधान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है और इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर का लोन दे दिया है। भारत ने इसके खिलाफ आवाज जरूर उठाई लेकिन, चाहते हुए भी भारत ने इस पेलआउट पैकेज के खिलाफ वोटिंग नहीं कर सका।

भारत ने लोन पर एतराज दर्ज करते हुए पाकिस्तान के खराब ट्रैक रिकॉर्ड का हवाला भी दिया और फंडिंग का विरोध कर कहा कि पाकिस्तान ने पहले भी जो वित्तीय मदद प्राप्त की है, उसका उपयोग सही तरीके से नहीं किया गया है।

IMF में कौन लेता है फंडिंग का निर्णय?

  • IMF कार्यकारी बोर्ड में 25 निदेशक होते हैं जो सदस्य देशों या देशों के समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह ऋण स्वीकृति सहित दैनिक परिचालन मामलों को संभालते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के विपरीत, जहां प्रत्येक देश के पास एक वोट होता है, IMF की वोटिंग शक्ति प्रत्येक सदस्य के आर्थिक आकार को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के पास असमान रूप से उच्च वोटिंग शेयर है। इस प्रकार चीजों को सरल बनाने के लिए, IMF आम तौर पर सर्वसम्मति से निर्णय लेता है।
  • ऐसे मामलों में जहां वोट की आवश्यकता होती है, सिस्टम औपचारिक "नहीं" वोट की अनुमति नहीं देता है। निदेशक या तो पक्ष में वोट कर सकते हैं या अनुपस्थित रह सकते हैं। ऋण या प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने का कोई प्रावधान नहीं है।

भारत क्यों नहीं कर पाया वोट?

  • भारत ने हाल ही में पाकिस्तान को ऋण स्वीकृत करने के लिए IMF में हुए मतदान में भाग नहीं लिया, ऐसा विरोध की कमी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए किया क्योंकि आईएमएफ के नियमों के तहत औपचारिक रूप से "नहीं" वोट की अनुमति नहीं है।
  • मतदान में भाग न लेकर भारत ने IMF की मतदान प्रणाली की सीमाओं के भीतर अपनी असहमति व्यक्त की और इस अवसर का उपयोग औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियों को दर्ज करने के लिए किया।
  • भारत ने IMF की वर्तमान सहायता की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान को पिछले 35 वर्षों में से 28 वर्षों में सहायता मिली है, जिनमें से पिछले पांच वर्षों में केवल चार कार्यक्रम ऐसे थे जिनमें कोई सार्थक या स्थायी सुधार नहीं हुआ।
  • भारत ने आर्थिक मामलों में पाकिस्तानी सेना के निरंतर प्रभुत्व को जोरदार ढंग से उजागर किया, जो पारदर्शिता, नागरिक निगरानी और स्थायी सुधार को कमजोर करता है।
  • भारत ने ऐसे देश को धन मुहैया कराने का कड़ा विरोध किया जो सीमापार आतंकवाद को प्रायोजित करता रहता है। भारत ने चेतावनी दी कि इस तरह के समर्थन से वैश्विक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को खतरा होता है और अंतरराष्ट्रीय मानदंड कमजोर होते हैं।

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