इस्‍लामाबाद/कोलंबो, ऑनलाइन डेस्‍क। कश्‍मीर एवं घाटी में सक्रिय आतंकवाद के खिलाफ भारत ने सख्‍त रुख अपनाया है। इसके चलते घाटी में आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है। घाटी में फ‍िर से आतंकवाद को फैलाने के लिए पाकिस्‍तान व्‍याकुल और बेचैन है। वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसने एक नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। पाकिस्‍तान अब अपने आतंकी करतूतों के लिए श्रीलंका की जमीन को इस्‍तेमाल करने की फ‍िराक में है। 22 जनवरी से पाक‍िस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की दो दिवसीय कोलंबों यात्रा के दौरान पाकिस्‍तान यह चाल चल सकता है।

भारत के खिलाफ श्रीलंका से सौदा कर सकता है पाक

  • प्रो. हर्ष पंत इस आशंका को पूरी तरह से खारिज नहीं करते। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान के जो आंतरिक हालात हैं उसमें इमरान खान के पास बहुत सीमित विकल्‍प हैं। प्रो पंत इसके दो प्रमुख कारण मानते हैं। पहला- पाकिस्‍तान पूरी तरह से कंगाल हो चुका है। पाक‍िस्‍तान की आर्थिक व्‍यवस्‍था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। देश में महंगाई चरम पर है।
  • दूसरा- पूरा विपक्ष इमरान सरकार के खिलाफ एकजुट है। ऐसे में इमरान  विपक्ष और देश की जनता का दिमाग भटकाने के लिए इमरान इस योजना पर काम कर सकते हैं। सरहद पर चौकसी के कारण पाकिस्‍तान में सक्रिय आतंकवादी बौखलाए हुए हैं। उन्‍होंने आशंका प्रगट की कि पाकिस्‍तान इसके लिए श्रीलंका को ढाल बना सकता है।
  • पाकिस्‍तान इसकी पहल जिनेवा में होने वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 46वें सत्र में कर सकता है। वह इस सत्र में श्रीलंका के साथ सौदा कर सकता है। दरअसल, इस सत्र में श्रीलंका से जुड़ा एक प्रस्‍ताव यूएनएचआरसी में लाया जा सकता है। यूएनएचआरसी के सत्र में श्रीलंका के मानव‍ाधिकार और इससे जुड़ी जवाबदेही के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
  • श्रीलंका यात्रा के दौरान इमरान कोलोंबो के समक्ष यह प्रस्‍ताव रख सकते हैं कि अगर वह अपनी जमीन का इस्‍तेमाल भारत के खिलाफ करने की अनुमति दे तो पाकिस्‍तान यूएनएचआरसी में आने वाले प्रस्‍ताव पर उसका पक्ष लेगा। उन्‍होंने कहा कि इस प्रकार की चाल पाकिस्‍तान चल सकता है।
  • यह भी कहा जा रहा है कि घरेलू राजनीतिक संकट से ध्‍यान हटाने के लिए प्रधानमंत्री इमरान श्रीलंका की यात्रा पर जा रहे हैं। पाकिस्‍तान में विपक्षी गठबंधन इमरान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।   

कश्‍मीर घाटी में 29 वर्षों में करीब 46 हजार लोगों की

गौरतलब है कि कश्‍मीर घाटी में पिछले 29 वर्षों में करीब 46 हजार लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में आम नागरिक और आतंकवादी दोनों शामिल हैं। मरने वाले आतंकवादियों में सर्वाधिक संख्‍या सीमा पर मारे गए आतंकियों की हैं। सुरक्षा बलों के साथ विभिन्‍न मुठभेड़ों में अब तक 24,000 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। मारे गए 24 हजार आतंकवादियों में करीब 11000 विदेशी आतंकी हैं।

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