मक्का तक पहुंचा हूती विद्रोहियों का खतरा, सऊदी की लड़ाई से बचने के लिए पाकिस्तान ने चली 'चाल'
इतिहास में पहली बार मक्का को हूती विद्रोहियों के हवाई हमलों की चेतावनी मिली, जिसके बाद सऊदी अरब ने इजरायल से खुफिया मदद मांगी।

सऊदी की लड़ाई से बचने के लिए पाकिस्तान ने चली 'चाल'। (रॉयटर्स)
HighLights
मक्का को हूती विद्रोहियों के हवाई हमलों की चेतावनी मिली।
सऊदी अरब ने हूती हमलों से बचाव हेतु इजरायल से मदद मांगी।
पाकिस्तान ने सऊदी के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से परहेज किया।
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। इतिहास में पहली बार, सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही समूह के बीच लड़ाई तेज होने के कारण इस्लाम के पवित्र शहर मक्का को हवाई हमलों की चेतावनी के साथ आपातकालीन अलर्ट पर रखा गया। हालांकि, कुछ ही मिनटों में अलर्ट को हटा लिया गया, लेकिन इसने मुस्लिम दुनिया में आक्रोश पैदा कर दिया और इलाके में चल रहे संघर्ष को और गहरा कर दिया।
इसने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच बहुतचर्चित मक्का समझौते में दरारों को भी उजागर कर दिया है, क्योंकि इस्लामाबाद के अपने हित के कारण लड़ाई से पीछे हटने के बाद रियाद ने मदद के लिए तेल अवीव का रुख किया।
सऊदी अरब ने इजरायल से मांगी मदद
इजरायली मीडिया के मुताबिक, इजरायल और सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड की मध्यस्थता में बातचीत की है, जिसमें रियाद ने 'द येरूसलम पोस्ट' के अनुसार, खुफिया सहायता के माध्यम से हूती हमलों से खुद को बचाने के लिए तेल अवीव से मदद मांगी।
सऊदी अरब और इजरायल के बीच औपचारिक संबंध नहीं
सऊदी अरब और इजरायल के बीच औपचारिक संबंध नहीं है, क्योंकि किंगडम अब्राहम समझौते में शामिल नहीं हुआ है और उसका मानना है कि तेल अवीव के साथ औपचारिक सामान्यीकरण के लिए फलस्तीनी राज्य के गठन की दिशा में एक स्पष्ट और अपरिवर्तनीय रास्ते की आवश्यकता है।
इसके बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि किंगडम को क्षेत्र में हूती सैन्य तैनाती की व्यापक तस्वीर विकिसत करने और भविष्य के अभियानों के लिए संभावित योजनाओं की पहचान करने के लिए खुफिया समर्थन पर केंद्रित इजरायल की सहायता लेनी पड़ी।
पाकिस्तान ने सऊदी के साथ सैन्य हमलों में शामिल होने से किया परहेज
यह तब हुआ जब इस्लामाबाद ने यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सैन्य हमलों में शामिल होने से परहेज किया, यह कहते हुए कि हाल ही में हस्ताक्षरित मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसे अभी इसके कार्यान्वयन के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
पाकिस्तान के 'डॉन' अखबार ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट दी थी कि पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने जोर देकर कहा कि यमन के अंदर हूती ठिकानों पर पाकिस्तानी बलों के हमले की संभावना वर्तमान में केवल एक काल्पनिक स्थिति है।
हालांकि, इस रुख पर आलोचना के बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर किसी भी हमले से मक्का रक्षा गठबंधन सक्रिय हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि रियाद ने इस्लामाबाद से संपर्क किया है या नहीं, लेकिन उन्होंने दोहराया कि हम समझौते के अनुसार मदद करने या प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य हैं।
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