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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पाकिस्तान में गंभीर जलवायु परिवर्तन से पिघल रहे ग्लेशियर, बढ़ रहा प्राकृतिक आपदा का खतरा

By Babli KumariEdited By:
Published: Wed, 11 May 2022 03:38 PM (IST)Updated: Wed, 11 May 2022 04:24 PM (IST)

पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ रहा है। पाकिस्तान पिछले दो महीने से भीषण गर्मी ...और पढ़ें

पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन चरम पर (फाइल फोटो)
पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन चरम पर (फाइल फोटो)

इस्लामाबाद, एएनआइ। शिस्पर ग्लेशियर के फटने और गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा में बाढ़ के बाद जलवायु परिवर्तन पाकिस्तान की मुख्य चिंताओं में से एक के रूप में उभरा है।

पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव खतरनाक होता जा रहा है और देश को किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्था और तैयारी करने की आवश्यकता है ताकि उचित आपदा नियंत्रण और उन्नत तकनीकों की मदद से क्षति की तीव्रता को कम किया जा सके।

पाकिस्तान में रिकॉर्ड-उच्च अप्रैल के तापमान ने ग्लेशियरों को सामान्य से अधिक तेजी से पिघलाया, जिससे पिछले शनिवार को देश के उत्तरी क्षेत्र के एक गांव में अचानक बाढ़ आ गई, जिसने एक प्रमुख पुल का हिस्सा मिटा दिया और घरों और इमारतों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

अप्रैल के महीने में रि‍कार्डतोड़ गर्मी

रिपोर्टों के मुताबिक, कई मौसम केंद्रों ने अप्रैल के लिए रिकॉर्ड ऊंचाई तय की। 30 अप्रैल को जैकोबाबाद ने दिन का सबसे गर्म तापमान 120 डिग्री फ़ारेनहाइट (49 सेल्सियस) दर्ज किया; द वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि कराची हवाईअड्डा 30 अप्रैल को भी रात के सबसे गर्म तापमान 84.9 डिग्री फ़ारेनहाइट (29.4 सेल्सियस) पर पहुंच गया था।

डॉन के मुताबिक काराकोरम राजमार्ग पर एक पुल के ढहने के संबंध में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग तैयार करने को कहा।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लेशियर की बाढ़ ने न केवल पुल को बल्कि जलमग्न घरों, कृषि भूमि की सैकड़ों नहरों, पेड़ों, जल आपूर्ति चैनलों और दो जल विद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान पिछले दो महीनों से भीषण गर्मी की चपेट में है।

पांचवां ऐसा देश जो जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक संवेदनशील

डॉन अखबार ने बताया कि, ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स की 2020 की रिपोर्ट में, पाकिस्तान ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के लिए पांचवां सबसे अधिक संवेदनशील देश है। कई अध्ययनों ने सुझाव दिया कि तापमान में वृद्धि पाकिस्तान के फसल के मौसम को बदल देगी और कुछ फसलों को उगाने की व्यवहार्यता को 'संभावित तौर पर स्थायी रूप से समाप्त' कर सकती है।

इसके अलावा, उन्होंने निर्धारित किया कि इस तरह की अधिक मौसम की घटनाएं गरीबी और कुपोषण, खाद्य असुरक्षा, जल संसाधनों पर तनाव, प्रमुख अनाज की कम पोषण गुणवत्ता और पशुधन उत्पादकता, जबरन प्रवास, और मनुष्यों और जानवरों दोनों में वायरल के प्रकोप को बढ़ावा देने में योगदान कर सकती  हैं।