Video: पाकिस्तान के कराची में गरबा की धूम, बॉलीवुड गानों पर जमकर थिरके लोग
कराची में गरबा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि सीमाओं के पार गुजराती विरासत को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम है।

कराची में हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर गरबा खेलते हैं।
HighLights
कराची में गरबा गुजराती विरासत को जीवित रखता है।
हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर गरबा खेलते हैं।
पारंपरिक गीतों संग बॉलीवुड गाने भी खूब बजते हैं।
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। कराची में कुछ लोगों के लिए गरबा आस्था और भक्ति का रूप है, तो दूसरों के लिए यह सीमाओं के पार अपनी गुजराती विरासत को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम।
एक लोकगीत, जिसमें एक नन्हा पक्षी गुजरात में देवी के पास उड़कर जाता है, उसे पाकिस्तान में भी नई उड़ान मिली है। यहां गुजराती भाषी समुदायों की कई पीढ़ियों ने नवरात्रि, शादियों और सामाजिक आयोजनों के जरिए गरबा को पूरी जीवंतता के साथ जिंदा रखा है।
मुस्लिम समुदाय भी गरबा में होते हैं शामिल
कराची के नारायणपुरा, रणछोड़ लेन और केमारी जैसे इलाकों में, गरबा त्योहारों के कैलेंडर का एक अहम हिस्सा है। हिंदू परिवार पूरी नवरात्रि के दौरान जश्न मनाते हैं, जबकि गुजराती मुस्लिम समुदाय भी सामाजिक कार्यक्रमों में गरबा करते हैं।
'भारत और पाकिस्तान के गरबा में अंतर नहीं'
सामाजिक कार्यकर्ता और स्तंभकार रमेश माना जो दशकों से इन आयोजनों को देखते आ रहे हैं उन्होंने बताया, 'पाकिस्तान और भारत में होने वाले गरबा में कोई फर्क नहीं है।'
जब 'पंखिड़ा रे उड़ी जाजो' गीत बजता है, तो कराची में लोगों के दिलों तक पहुंचने के लिए इसे किसी वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती। 'उम्ब्रे उभी सांभलु रे बोल' जैसे पारंपरिक क्लासिक गीतों के साथ-साथ 'ढोली तारो ढोल बाजे' और 'चोगाडा तारा' जैसे बॉलीवुड के लोकप्रिय गाने भी डांस फ्लोर पर गूंजते हैं, जो युवा पीढ़ी को खूब आकर्षित करते हैं।
कराची स्थित श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर और स्वामीनारायण मंदिर गरबा आयोजनों के प्रमुख केंद्र हैं। गुजरात की ही तरह यहां भी छोटे-छोटे मोहल्लों से लेकर बड़े पैमाने तक के गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सुरक्षा इंतजाम और बढ़ता दायरा
कराची के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अमरशी भट्टी ने सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में बताते हुए कहा, 'हमें कार्यक्रमों में बाउंसरों का इंतजाम करना पड़ता है। लेकिन ऐसा बहुत कम हुआ है जब कराची में गरबा के दौरान कोई टकराव या तनाव की स्थिति बनी हो।'
गुजराती भाषा बचाओ अभियान का नेतृत्व करने वाले हैदर खोजाका कहना है कि पिछले एक दशक में गरबा का दायरा और बढ़ा है। अब इसमें गैर-गुजराती लोग भी बढ़-चढ़कर दिलचस्पी ले रहे हैं।
मुस्लिम समुदायों में गरबा की अनोखी परंपरा
जहां गुजराती मुस्लिम परिवार शादियों में गरबा करते हैं, वहीं खोजा इस्माइली मुस्लिम समुदाय की एक अलग और अनोखी परंपरा है।
खोजा इस्माइली मुसलमान अपने 50वें इमाम के जन्मदिन के अवसर पर 12 अक्टूबर को गरबा का आयोजन करते हैं। हालांकि, मुस्लिम समुदायों के भीतर संगीत और नृत्य में शामिल होने को लेकर अलग-अलग विचार भी देखने को मिलते हैं।
विविधता में एकता की पहल
कराची की इन्फ्लुएंसर एरुज फातिमा जिन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क से अपनी पढ़ाई पूरी की है, इस साझा सांस्कृतिक कड़ी को एक समावेशी मंच देना चाहती हैं।
वे 25 अक्टूबर को एक विशेष 'गरबा नाइट' का आयोजन कर रही हैं, जिसमें सभी धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल हो सकते हैं। उनका कहना है कि डांस फ्लोर पर कुछ घंटों के लिए, सीमाएं और पृष्ठभूमि सब पीछे छूट जाती हैं। घेरा लगातार घूमता रहता है, और इसमें हर किसी के लिए जगह होती है।
अब अंधभक्तों का क्या होगा पाकिस्तान में भी लोग नवरात्रि में गरबा कर रहे हैं..... https://t.co/cwLrWoSSTH
— Alka Maurya (@MauryaAlka76391) October 17, 2026
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