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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चीन के विदेश मंत्री वांग पहुंचे पाकिस्तान, कुरैशी के साथ हुई कश्मीर मसले पर बातचीत

By Bhupendra SinghEdited By:
Published: Sun, 08 Sep 2019 01:03 AM (IST)Updated: Sun, 08 Sep 2019 07:18 AM (IST)

पाकिस्तान के विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में आपसी संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। कश्मीर मसले पर खासतौर से बात हुई।

चीन के विदेश मंत्री वांग पहुंचे पाकिस्तान, कुरैशी के साथ हुई कश्मीर मसले पर बातचीत
चीन के विदेश मंत्री वांग पहुंचे पाकिस्तान, कुरैशी के साथ हुई कश्मीर मसले पर बातचीत

इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान पहुंचे चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने शनिवार को अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से कश्मीर मसले पर चर्चा की। दोनों ने कहा कि कश्मीर में भारत की एकतरफा कार्रवाई हालात को और जटिल बना सकती है। वांग अफगानिस्तान मसले पर विदेश मंत्री स्तर की त्रिपक्षीय वार्ता के लिए इस्लामाबाद आए हैं। इस वार्ता में उन्होंने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ हिस्सा लिया।

चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता

पाकिस्तान के विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में आपसी संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। कश्मीर मसले पर खासतौर से बात हुई। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के भारत सरकार के कदम के बाद पाकिस्तान बौखला गया है और वह भारत की कार्रवाई के खिलाफ माहौल बनाने में लगा हुआ है।

कुछ हद तक चीन उसका इस कोशिश में साथ दे रहा है। चीन के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी जम्मू-कश्मीर मसले पर अनौपचारिक चर्चा हो चुकी है, लेकिन इस सबका पाकिस्तान को कोई लाभ नहीं मिला है। भारत ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर का मसला उसका अंदरूनी मसला है। उसे लेकर पाकिस्तान जिस तरह से गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहा है और भड़कावे वाले कार्य कर रहा है, वह घोर निंदनीय है।

तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक

अफगानिस्तान मसले पर तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा गया कि अफगानिस्तान से विदेशी फौजों की वापसी चरणबद्ध तरीके से हो। यह अनुरोध अफगानिस्तान से अमेरिका के नेतृत्व वाली नाटो की फौजों की वापसी के संभावित समझौते के मद्देनजर किया गया है। इस समझौते के नजदीक होने के बावजूद तालिबान लगातार हमले कर रहा है।