बलूचिस्तान में 11 अगस्त को क्यों मनाया गया आजादी का जश्न? Inside Story
पाकिस्तानी पाबंदियों के बावजूद बलूचिस्तान में बलूच राष्ट्रवादियों ने 'जश्न-ए-आजादी' मनाया, जिसे वे 1948 के विलय को जबरन कब्जा मानते हैं।
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पाकिस्तानी पाबंदियों के बीच बलूचिस्तान में 'जश्न-ए-आजादी' मनाया गया

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को बलूच राष्ट्रवादियों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ मनाया। समारोहों को रोकने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा पाबंदियां लगाए जाने और कई इलाकों में इंटरनेट व मोबाइल सेवाएं बंद किए जाने के बावजूद स्थानीय लोगों के जश्न मनाने का दावा किया गया है।
बलूच राष्ट्रवादी 1948 में पाकिस्तान के साथ बलूचिस्तान के विलय को जबरन कब्जे के तौर पर देखते हैं और लंबे समय से इसका विरोध करते रहे हैं।
आइएएनएस के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच नेता मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के कलात, क्वेटा और खुजदार समेत कई इलाकों में संचार सेवाएं बाधित की गईं तथा सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई।
उन्होंने एक्स पर दावा किया कि सैन्य प्रतिष्ठानों और पुलिस थानों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के साथ हवाई निगरानी भी की गई। उनके मुताबिक, इन पाबंदियों के बावजूद लोगों ने विभिन्न इलाकों में आजादी का जश्न मनाया।
बलूचिस्तान में 'जश्न-ए-आजादी' मनाया गया
इंटरनेट बंद होने के कारण समारोहों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने में समय लग रहा है। वैश्विक मंच पर बलूचिस्तान के लोगों की आवाज उठाने के लिए बलूच नेता ने मुख्य रूप से भारत का आभार जताया।
पुल उड़ाने की जिम्मेदारी यूबीए ने लीस्थानीय मीडिया के अनुसार, यूनाइटेड बलूच आर्मी (यूबीए) ने कच्छी जिले में एक पुल को विस्फोट से उड़ाने की जिम्मेदारी ली है।
‘बलूचिस्तान पोस्ट’ के मुताबिक, यूबीए प्रवक्ता मज़ार बलूच ने दावा किया कि संगठन के लड़ाकों ने धादर के पास सन्नी रोड पर सबरी में पुल को निशाना बनाया। संगठन ने इसे पाकिस्तानी सेना की आवाजाही और लाजिस्टिक्स बाधित करने की कार्रवाई बताया है।
बाढ़ राहत फंड को लेकर विश्व बैंक की चिंताए
एनआई के अनुसार, बलूचिस्तान में बाढ़ राहत के लिए मिले फंड के इस्तेमाल को लेकर विश्व बैंक ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है। ‘डान’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए मजबूत घर बनाने की योजना के फंड को दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाने के फैसले पर गंभीर चिंता जताई है।
बैंक का कहना है कि इससे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विश्व बैंक के अनुसार, योजना के 84 प्रतिशत लाभार्थी ‘अति-गरीब’ या ‘कमजोर’ श्रेणी में हैं। करीब 28 प्रतिशत की मासिक आय 30 डालर से कम है।
बड़ी संख्या में लाभार्थी किराएदार और दिहाड़ी मजदूर हैं। बैंक ने कहा कि इन परिवारों के पास बचत और औपचारिक कर्ज तक पहुंच सीमित होने के कारण प्राकृतिक आपदा के बाद संभलने की क्षमता बेहद कम है।
बलूचिस्तान एक नजर में
पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान देश के करीब 43.6 प्रतिशत क्षेत्र में फैला है। गैस, सोना, तांबा, तेल और अन्य खनिजों से समृद्ध होने के बावजूद यह देश के सबसे पिछड़े और गरीब प्रांतों में शामिल है।
इसकी करीब 770 किलोमीटर लंबी तटरेखा और ग्वादर बंदरगाह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यहां गरीबी दर करीब 47 प्रतिशत है, जबकि 2024-25 में पाकिस्तान की राष्ट्रीय गरीबी दर 28.9 प्रतिशत बताई गई थी।
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