बलूच लड़ाकों में महिला फिदायिनियों की कैसे हुई एंट्री? ‘ऑपरेशन हेरोफ’ से कांप गई पाकिस्तानी आर्मी
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाल ही में हुए आत्मघाती हमलों में 33 लोग मारे गए, जिसमें महिलाओं की भूमिका प्रमुख ...और पढ़ें

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शनिवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कई आत्मघाती बम धमाकों में कम से कम 33 लोग मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि सेना की तरफ से हमले का जवाब दिया और 92 आतंकवादियों को मार गिराया गया।
'द गार्जियन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमलें में बलूच विद्रोहियों ने नागरिकों, हाई-सिक्योरिटी जेल, पुलिस स्टेशनों और अर्धसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया। सेना ने बताया कि मारे गए लोगों में 18 नागरिक, 15 सुरक्षाकर्मी और 92 विद्रोही शामिल थे।
क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान लंबे समय से विद्रोह की चपेट में है, यहां बलूच समूह कहते हैं कि उनकी लड़ाई राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक अनदेखी और उनके संसाधनों के शोषण के खिलाफ है।
हाल के सालों में बलूच विद्रोहियों में महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिसमें आत्मघाती बम धमाके भी शामिल हैं।

कहां तक फैलीं हैं बलूच विद्रोह की जड़ें?
बलूच उग्रवाद, राष्ट्रवादी और अलगाववादी समूहों द्वारा चलाया जाता है जो बलूचिस्तान के लिए स्वतंत्रता की मांग करते हैं।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे गैंग सरकार पर संसाधनों के शोषण और राजनीतिक उपेक्षा का आरोप लगाते हैं।
पाकिस्तान इन ग्रुप्स को आतंकवादी संगठन बताता है और उनके कामों के लिए विदेशी प्रभाव और क्रिमिनल नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराता है।
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क्या है 'ऑपरेशन हेरोफ फेज II'?
BLA का ऑपरेशन 'हेरोफ फेज II' पाकिस्तान के कई इलाकों में एक बड़ा हमला था। यह ऑपरेशन करीब 40 घंटे चला।
विद्रोही ग्रुप ने दावा किया कि इस हमले में पाकिस्तानी सेना के 200 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए और 17 पकड़े गए, हालांकि इसकी आधिकारिक नहीं हुई है।
वहीं, हमले में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री ने 17 सुरक्षाकर्मियों और 31 नागरिकों की मौत की बात स्वीकारी।इस हमले में महिला 'फिदायीन' (आत्मघाती हमलावरों) ने अहम भूमिका निभाई।
'द गार्जियन' की रिपोर्ट्स के अनुसार मारे गए 18 BLA लड़ाकों में से 11 महिलाएं थीं, जिनमें आसिफा मेंगल भी शामिल थीं, जिन्होंने नोशकी में ISI मुख्यालय पर हमला किया था। वहीं, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ किया कि हमले में कम से कम दो हमलों में महिलाएं शामिल थीं।
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कैसे हुआ महिला आत्मघाती हमलावरों का उदय?
शुरुआती बलूच विद्रोह ग्रुप्स में पुरुषों का दबदबा था, आत्मघाती हमले कम किए जाते थे। 2022 से, बलूच ग्रुप्स ने आत्मघाती मिशन बढ़े, जिसमें महिलाओं को सबसे आगे रखा गया।
परंपरागत रूप से, विद्रोह से जुड़ी महिलाएं पीछे से भूमिका निभाती थीं, जैसे राजनीतिक मैसेज फैलाना, फंड इकट्ठा करना, लड़ाकों के परिवारों का समर्थन करना या अधिकारों पर आधारित विरोध प्रदर्शनों में भाग लेना।
लेकिन, अप्रैल 2022 में BLA ने बलूच विद्रोह में पहला महिला आत्मघाती हमला किया, जिसके बाद अगले तीन सालों में लगातार हमले किए।
कब और कहां किए गए महिला आत्मघाती हमले?
बलूच विद्रोहियों में पहली महिला आत्मघाती हमलावर, शरी बलूच थी, जिसने कराची विश्वविद्यालय में कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट पर हमला किया था। जिसमें कई चीनी ट्रेनर और एक पाकिस्तानी ड्राइवर मारा गया था।
शरी बलूच, 30 साल की एक स्कूल टीचर और दो बच्चों की मां थीं। उसके पास जूलॉजी में MSc की डिग्री थी साथ ही वो MPhil प्रोग्राम में इनरोल थी।
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सुमैया कलंदरानी बलूच
सुमैया ने तुरबत में एक सैन्य काफिले पर आत्मघाती हमला किया था। उसने इससे पहले BLA के मीडिया विंग में काम किया था और रेहान बलूच से उसकी सगाई हुई थी।

महल बलूच
महल बलूच ने बेला में एक फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) कैंप के गेट पर कार-बम हमला किया था।
महीकन बलूच
महकीन ने कलात में एक पैरामिलिट्री काफिले को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला किया था। ये चारों BLA से जुड़ी थीं और पढ़े-लिखे, मिडिल क्लास परिवारों से थीं।
नोकुंडी में आत्मघाती हमला
नवंबर 2025 में, जरीना रफीक उर्फ 'तरंग महो' ने चाघी जिले के नोकुंडी में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय में बम से भरी गाड़ी घुसा दी थी।
BLF ने उसकी पहचान अपने नए बने 'सादो ऑपरेशनल' बटालियन की सदस्य के तौर पर की। यह हमला BLF द्वारा महिला आत्मघाती हमलावर का पहला पक्का इस्तेमाल था।
क्यों हो रहा आतंकवादी समूह महिलाओं का इस्तेमाल?
बलूचिस्तान के पितृसत्तात्मक समाज में, एक महिला द्वारा आत्मघाती हमला करना एक संदेश देता है। आतंकवादी इसे इस सबूत के तौर पर पेश करते हैं कि दमन ने महिलाओं को भी चरम हिंसा करने पर मजबूर कर दिया है।
महिलाओं की भागीदारी का इस्तेमाल पुरुषों को विद्रोह में शामिल होने के लिए शर्मिंदा करने के लिए भी किया जाता है। यह रणनीति प्रतिद्वंद्वी बलूच समूहों में आग की तरह फैल गई है।
