इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ एक प्रभावशाली मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व में आजादी मार्च को गुरुवार को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। यह फैसला लाहौर में ट्रेन हादसे के कारण लिया गया।

इमरान खान के त्यागपत्र की मांग 

दक्षिणपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआइ-एफ) की ओर से यह मार्च 27 अक्टूबर को दक्षिणी सिंध से शुरू किया गया है। इसे 31 अक्टूबर को इस्लामाबाद पहुंचना था। मार्च के जरिये इमरान खान के त्यागपत्र की मांग की जा रही है। इमरान पर 2018 के आम चुनाव में धांधली के जरिये जीतने का आरोप लगाया गया है।

इमरान में शासन चलाने की काबिलियत

रहमान का यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री इमरान आर्थिक कुप्रबंधन के दोषी हैं और उनमें शासन चलाने की काबिलियत नहीं है। इस मार्च के कारण इमरान पर दबाव काफी बढ़ गया है। जेयूआइ-एफ के वरिष्ठ नेता अकरम दुर्रानी ने एक रैली में बताया कि अब यह मार्च शुक्रवार को नमाज के बाद शुरू होगा और इसमें कई वरिष्ठ विपक्षी नेता भी भाग लेंगे।

इमरान खान का त्यागपत्र देने से इन्कार

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेता अहसन इकबाल ने भी कहा कि विपक्षी दलों ने ट्रेन हादसे के कारण अपनी रैली स्थगित करने का फैसला किया है। इमरान खान ने पद से त्यागपत्र देने से इन्कार किया है। हालांकि वह और उनकी पार्टी चुनावी सिस्टम या शासन संचालन के तौर-तरीकों में सुधार के लिए किसी भी अन्य मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार है।

राजधानी में बढ़ाई गई चौकसी 

इस्‍लामाबाद के स्कूलों और कुछ कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। सभी प्रदर्शनकारी पूर्वी लाहौर के रास्ते से होते हुए इस्लामाबाद की ओर बढ़ने वाले थे। इस प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने चौकियों पर चौकसी बढ़ा दी गई हैं और अतिरिक्त बलों को तैनात कर दिया गया है।

ठीक ऐसे में नवाज शरीफ के खिलाफ 2014 में इमरान खान के धरने के कारण इस्‍लामाबाद 123 दिनों तक पूरी तरह से बंद था। यहां तक कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा भी रद्द करनी पड़ी थी। इस दौरान उन्‍होंने कंटेनरों से धरना दिया था।  

Posted By: Arun Kumar Singh

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