इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बाद मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी कबूला है कि मुंबई आतंकी हमले के पीछे लश्कर के आतंकियों का हाथ था। यह बात इमरान खान ने खुद कबूली है। पाकिस्तान में सरकार बनाने के बाद पहली बार शुक्रवार को इमरान खान ने विदेशी मीडिया (वॉशिंगटन पोस्ट) को अपना पहला इंटरव्यू दिया। इस मौके पर वे कई विषयों पर बोलते दिखे, जिसमें 26/11 आतंकी हमले के गुनहगार लशकर- ए- तैयबा का आतंकी रहमान लखवी के जेल से रिहा होने पर उठे सवालों का भी जिक्र भी था।

मुंबई हमले पर इमरान का कबूलनामा

वॉशिंगटन पोस्ट को दिए अपने इंटरव्यू में इमरान ने कहा, '2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में लश्कर के आतंकी शामिल थे। मैंने अपनी सरकार को इस केस की स्थिति को जानने के आदेश दिए हैं। इस केस को सुलझाना हमारे लिए जरूरी है, क्योंकि यह एक आतंकी हमला था।' जो बात भारत लगातार पाकिस्तान और विश्व मंच पर कहती आई है। उस बात नौ साल पुराने केस पर पहली बार इमरान खान ने कबूला है कि मुंबई हमले में LeT के आतंकी शामिल थे। उन्होंने ये बयान आतंकी संगठन लशकर- ए- तैयबा के प्रमुख जकीउर रहमान लखवी के जेल से रिहा होने पर उठ रहे सवालों पर दिया। इमरान ने कहा कि वे चाहते हैं कि मुंबई में बम धमाकों को अंजाम देने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मुंबई हमले में था पाकिस्तान का हाथ : नवाज शरीफ

इमरान से पहले पाक के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का भी मुंबई आतंकी हमले पर बड़ा कबूलनामा सामने आया था। उन्होंने माना था कि  पाकिस्तान सरकार की मदद से आतंकी सीमा पार करके भारत में पहुंचे थे। पाकिस्तान अखबार 'डॉन' को दिए इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में नवाज शरीफ ने कहा था कि पाकिस्तान सरकार ने आतंकियों को सीमा पार करके जाने और मुंबई में हमला करने की इजाजत क्यों दी? साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान में चल रहे 26/11 केस का ट्रायल पूरा न होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि आतंकियों का समर्थन करने के कारण पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है।

वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में क्या-क्या बोले इमरान

  • 9/11 हमले पर पूछे गए सवाल पर इमरान ने कहा कि इस आतंकी हमले में पाकिस्‍तान का कतई हाथ नहीं है। उन्‍होंने कहा कि ये आराेप बेबुनियाद है और मुल्‍क की छवि को खराब करता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की बात को भी उन्‍होंने खारिज कर दिया। इमरान ने कहा कि आतंकी संगठन अलकायदा अफगानिस्तान में था, इसमें कोई पाकिस्तानी शामिल नहीं था।
  • अमेरिका-पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्‍तों पर प्रधानमंत्री इमरान ने कहा कि मैं उनके साथ कतई संबंध नहीं रखना चाहता हूं, जो हमारे मुल्‍क को एक किराए के बंदूक की तरह इस्तेमाल करने की सोचते हैं या हमें दूसरों की लड़ाई लड़ने के लिए धन का प्रलोभन देते हैं।
  • पाकिस्‍तान तालिबान की शरणस्‍थली है। प्रमुख तालीबानी नेता पाक में शरण लिए हुए हैं। इस सवाल पर इमरान ने कहा कि ये आराेप बेबुनियाद है। उन्‍होंने कहा कि हुकूमत में आने के बाद मैंने सुरक्षाबलों के साथ बैठक की और इसकी पूरी समीक्षा कराई। उन्‍होंने कहा कि क्‍या मुझे कोई तालिबान नेताओं के छिपे होने या रहने का ठिकाना बता सकता है। मैं उनके साथ्‍ा वहां चलने काे तैयार हूं।
  • चीन से साथ पाकिस्‍तान के प्रगाढ़ होते रिश्‍तों के बारे में उन्‍होंने कहा कि दाेनों देश के बीच संबंध एकतरफा नहीं है। यह द्विपक्षीय है। चीन के साथ हमारे दीर्घकालीन सैन्‍य और व्‍यापारिक करार है। कई परियोजनाएं पर दोनों मुल्‍क संयुक्‍त रूप से काम कर रहे हैं।

Posted By: Nancy Bajpai

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