काबुल, एएनआइ। तालिबान की नई सरकार को बने एक माह से ज्यादा हो गया है लेकिन अन्य देशों में चल रहे अफगान दूतावासों का भविष्य अभी भी अनिश्चय की स्थिति में है। कई दूतावासों ने तालिबान की सरकार से संपर्क ही नहीं किया है फ्रांस और जर्मनी सहित कई दूतावासों ने मेजबान देशों में शरण मांगी है। कई दूतावास अभी भी पूर्व मंत्री हनीफ अतमार और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के संपर्क में हैं।

राजदूतों की बैठक करनी पड़ी रद

तालिबान सरकार की हालत ये है कि कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने सभी राजदूतों के साथ एक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया, जिसे बाद में रद करना पड़ा क्योंकि अधिकांश दूतावासों से कोई जवाब ही नहीं मिला। पझवोक अफगान न्यूज के अनुसार कुछ दूतावास तो स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं, उनका राजस्व कहां से आ रहा है, इसका कोई पता नहीं है।

तालिबान सरकार की बढ़ी मुश्किलें

एक दूतावास ने तो अपना कोई हिसाब ही देने से मना कर दिया है। पांच दूतावास ऐसे हैं, जो तालिबान सरकार के मंत्रालय की किसी बात का कोई जवाब ही नहीं दे रहे हैं। कुछ ही ऐसे दूतावास हैं जिनसे तालिबान का संपर्क है। इन दूतावासों के राजदूत भी नहीं समझ पा रहे हैं कि मेजबान देश उन्हें मान्यता भी देंगे या नहीं।

विदेश मंत्रालय हुआ खाली

विदेश मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि पूरा मंत्रालय खाली हो गया है। यहां के 80 फीसद कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं और अफगानिस्तान से बाहर जा चुके हैं। आमतौर पर विदेश मंत्रालय का राजनीतिक विभाग ही दूसरे देशों में दूतावासों से संपर्क रखता है। अब यहां भी कुछ ही अधिकारी बचे हैं। ज्यादातर अफगान दूतावासों से तालिबान सरकार का संपर्क कट गया है।

मानवाधिकार परिषद के आफिस पर किया कब्जा

समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार अफगानिस्तान के मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि तालिबान उन्हें काम नहीं करने दे रहा है। तालिबान ने उनके कार्यालय पर कब्जा कर लिया है। अफगान मानवाधिकार परिषद ने एक बयान में कहा है कि तालिबान के 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद भी जनता के लिए कार्य किया जा रहा था। अब तालिबान ने उनके कार्यालय पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने यहां अपने लोग बिठा दिए हैं जो उनके कंप्यूटर और गाड़ी इस्तेमाल कर रहे हैं।