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'मैं डर के साये में जी रही हूं', 15 लाख पाकिस्तानी बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार; रिपोर्ट में दावा

Published: Mon, 21 Sep 2026 05:36 PM (IST)

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में अनुमानित 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार हुए हैं, जिसमें जारा शाह (बदला हुआ नाम) जैसी किशोरियां भी शामिल हैं।

15 लाख पाकिस्तानी बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

15 लाख पाकिस्तानी बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. पाकिस्तान में 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार।

  2. यूनिसेफ रिपोर्ट: 85% अपराधी पीड़ितों के परिचित निकले।

  3. बदनामी के डर से 71% पीड़ितों ने चुप्पी साधी।

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक टीनएजर जारा शाह (बदला हुआ नाम) को एक अजनबी ने कंप्यूटर गेम खेलते समय निशाना बनाया और बातचीत में फंसाकर ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार बनाया।

यूएन की बच्चों के लिए काम करने वाली एजेंसी की इस महीने जारी रिपोर्ट के अनुसार, वह पाकिस्तान के उन अनुमानित 15 लाख बच्चों में से एक है, जिन्होंने एक साल में ऑनलाइन यौन शोषण का अनुभव किया।

ऑनलाइन गेम खेलते हुए बातचीत की शुरुआत

17 साल की शाह ने कहा कि हमने ऑनलाइन गेम खेलते हुए बातचीत शुरू की और वह दोस्त की तरह व्यवहार करने लगा। बाद में, वह मिलना चाहता था और फिर मुझसे न्यूड तस्वीरें मांगने लगा। जब मैंने मना किया कि तो उसने धमकी दी कि वह ऑनलाइन मेरे परिवार को ढूंढ लेगा और उन्हें बता देगा कि हम बात कर रहे थे।

85 प्रतिशत अपराधी पीड़ितों के परिचित- यूनिसेफ

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत अपराधी पीड़ितों के परिचित थे। रिपोर्ट के मुख्य लेखक डोनियल कार्डफेल्ट ने बताया कि शोषण की शुरुआत दोस्ताना बातचीत, गेमिंग के दौरान बातचीत या तोहफे, पैसे या रोमांस के वादे से हो सकती है। अपराधी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी का इस्तेमाल करके भरोसा बनाने में महीने लगा सकते हैं।

71 प्रतिशत पीड़ितों ने शोषण के बारे में किसी को नहीं बताया

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम-बहुल पाकिस्तान में 71 प्रतिशत पीड़ितों ने किसी को नहीं बताया, जबकि सर्वे में शामिल किसी भी बच्चे ने पुलिस, हेल्पलाइन या सोशल वर्कर जैसे औपचारिक माध्यमों से शोषण की रिपोर्ट नहीं की। उनकी चुप्पी का मुख्य कारण बदनामी का डर, शर्म और इस बात का डर था कि उनका परिवार या समाज कैसी प्रतिक्रिया देगा।

44 प्रतिशत बच्चों का ऑनलाइन शोषण- पहचान

पूर्वी शहर लाहौर में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'पहचान' (PAHCHAAN) की डायरेक्टर महक नईम ने कहा कि रिपोर्ट किए गए शोषण में से लगभग 44 प्रतिशत पूरी तरह से ऑनलाइन हुआ, जिसमें स्नैपचैट और व्हाट्सएप सबसे आम माध्यम थे।

रूढ़िवादी समाज में लड़कियों को यौन शोषण के जरिए ब्लैकमेलिंग का ज्यादा खतरा हो सकता है, जिससे उनके बाहर निकलने-फिरने पर पाबंदियां लग सकती हैं या उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ सकता है। जारा के लिए, परिवार के सामने पोल खुलने का डर ही उसे चुप रखने के लिए काफी था।

उसने कहा कि मुझे स्कूल जाने या घर से बाहर निकलने से रोका जा सकता था। मुझे बोलने के बजाय चुप रहना बेहतर लगा। लेकिन घबराहट मुझे हर दिन मार रही है। मैं डरी हुई थी, और अब भी हूं। मैं डर के साये में जी रही हूं।

(समाचार एजेंसी एएफपी के इनपुट के साथ)

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