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लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के बैन का बचाव कर चौतरफा घिरे जाकिर नाइक, जमकर हो रही आलोचना

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:46 PM (IST)

लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के प्रतिबंधों का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के बाद जाकिर नाइक को भारत, पाकिस्तान ...और पढ़ें

लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के बैन का बचाव कर चौतरफा घिरे जाकिर नाइक।

लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के बैन का बचाव कर चौतरफा घिरे जाकिर नाइक।

HighLights

  1. जाकिर नाइक ने तालिबान के शिक्षा प्रतिबंधों का बचाव किया।

  2. भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में कड़ी आलोचना का सामना।

  3. मलाला के पिता, सांसद ने बयानों को चिंताजनक बताया।

डिजिटल डेस्क, काबुल। लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान की पाबंदियों का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के बाद, विवादित भारतीय इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक को भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और आम नागरिकों की कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो क्लिप में, नाइक ने दावा किया कि मीडिया अफगानिस्तान के हालात को गलत तरीके से पेश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि मीडिया में आने वाली हर बात सच नहीं होती। जाकिर ने कहा कि अगर कोई शिक्षक मिलने कर शिक्षा में देरी करता है, तो कोई समस्या नहीं है।

उन्होंने तालिबान के प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि तालिबान ने सुरक्षा व्यवस्था बहाल होने तक लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा को केवल कुछ समय के लिए टाल दिया है। उन्होंने बताया कि कक्षा 6 तक प्राथमिक शिक्षा जारी है, लेकिन सुरक्षित माहौल न होने और महिला शिक्षकों की कमी के कारण उच्च शिक्षा को रोक दिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि अफगान महिलाएं इस्लामिक स्टडीज और शरिया में मास्टर डिग्री और पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं।

'बेहद चिंताजनक'

पाकिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई के पिता ने नाइक के बयानों की कड़ी निंदा की और उन्हें बेहद चिंताजनक और निराशाजनक बताया।

उन्होंने कहा कि डॉ. जाकिर नाइक जैसे वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान का, तालिबान द्वारा लड़कियों को शिक्षा से पूरी तरह बाहर रखने के फैसले को सही ठहराना, बेहद चिंताजनक और निराशाजनक है।

'शानदार तर्क'

अफगानिस्तान की निर्वासित सांसद मरियम सुलेमानखिल ने तंज कसते हुए नाइक के तर्क को शानदार बताया। उन्होंने 'X' पर लिखा कि जाकिर नाइक के अनुसार, अफगान लड़कियों की शिक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वे बस महिला शिक्षकों का इंतजार कर रही हैं। वही महिला शिक्षक, जिन्हें तालिबान ने काम करने से ही रोक दिया है? क्या शानदार तर्क है, डॉक्टर!

'बेहद अनैतिक लोग'

भारतीय इतिहासकार रुचिका शर्मा ने धार्मिक पुरुषों को बेहद अनैतिक लोग करार दिया। शर्मा ने कहा, "धार्मिक पुरुष बेहद अनैतिक होते हैं। सोचिए, वे पूरी ताकत से इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, और न ही मुसलमानों के बीच अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर लगे इस भयानक प्रतिबंध की निंदा कर रहे हैं। यह दुनिया में मानवाधिकारों के सबसे बड़े उल्लंघनों में से एक है!!

26 लाख अफगान लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित रखा गया: यूनिसेफ

यूनिसेफ के अनुसार, सितंबर 2021, जब तालिबान फिर से सत्ता में आया, के बाद से 26 लाख से ज्यादा अफगान लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित रखा गया है। अफगानिस्तान दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह से बंद हैं।

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