क्या है फरक्का समझौता, गंगाजल पर कैसे टिकी भारत-बांग्लादेश की दोस्ती? Inside Story
बांग्लादेश के मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध फरक्का समझौते पर निर्भर करते हैं, जिसमें बांग्लादेश के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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भारत-बांग्लादेश के रिश्ते जल साझा करने पर निर्भर

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश के ग्रामीण विकास (एलजीआरडी) व सहकारी मंत्री और सत्तारूढ़ दल बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि फरक्का समझौता भारत के साथ बांग्लादेश के हितों को बनाए रखते हुए हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए।
भारत से द्विपक्षीय संबंध गंगा जल साझा करने के समझौते (फरक्का समझौते) पर दस्तखत पर ही निर्भर करेगा। बीएनपी नेता और केंद्रीय मंत्री आलमगीर ने यह टिप्पणी बीएनपी द्वारा यहां इंजीनियर्स संस्थान (आइईबी) में आयोजित एक चर्चा के दौरान की, जो फरक्का लॉन्ग मार्च दिवस के अवसर पर थी।
भारत-बांग्लादेश के रिश्ते जल साझा करने पर निर्भर
आलमगीर ने कहा, 'मैं भारत सरकार को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि फरक्का समझौता बांग्लादेश के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत के माध्यम से तैयार किया जाना चाहिए। भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का अवसर गंगा जल साझा करने के समझौते या फरक्का समझौते के हस्ताक्षर पर निर्भर करेगा।'
फखरुल ने कहा कि बांग्लादेश अपने हितों से समझौता करके किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने देगा। भारत को समझौते को नवीनीकरण के लिए आगे आना चाहिए।
इस मामले में सब कुछ बांग्लादेश के हितों की रक्षा करते हुए पूरा होगा। आलमगीर ने यह भी उल्लेख किया कि गंगा जल साझा करने का समझौता 2026 में समाप्त हो जाएगा और इस बीच वर्तमान सरकार का पद्मा बैराज बनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। यह निर्णय लोगों के लाभ के लिए बहुत तेजी से लिया गया है।
फखरुल ने कहा कि देश के लोगों को संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि हम मातृभूमि के मुद्दे पर एकजुट हैं, तो कोई भी साजिश के तहत देश के खिलाफ सिर नहीं उठा सकेगा। पड़ोसी देश फरक्का डैम के नाम पर अन्याय कर रहा है।'
बांग्लादेश ने पद्मा नदी पर एक बैराज बनाने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसे ढाका ने 'फरक्का बैराज' के 'नकारात्मक प्रभाव' को संतुलित करने के लिए बताया है।
2033 तक पूरा होने की संभावना वाली यह परियोजना इस सप्ताह की शुरुआत में बांग्लादेश की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मंजूरी दी गई थी।
भारत अच्छा मित्र, पर हावी न हों
बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद के डिप्टी स्पीकर कैसर कमाल ने कहा कि बांग्लादेश ने हमेशा भारत को एक मित्रवत देश माना है, पर वह एक-दूसरे पर हावी नहीं हों।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब बांग्लादेश में एक शासन परिवर्तन हुआ है, जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) फरवरी में सत्ता में आई है।
भारत से संबंधों के बारे में बांग्लादेश की संसद में डिप्टी स्पीकर कैसर कमाल ने मीडिया से कहा, 'बांग्लादेश हमेशा भारत को एक अच्छा मित्र मानता है, लेकिन यह मित्रता एक-दूसरे का सम्मान करते हुए होनी चाहिए। यह नहीं होना चाहिए कि एक-दूसरे पर हावी होना।'
बैरिस्टर कैसर कमाल ने कहा, 'बांग्लादेश के लोगों ने वर्तमान सरकार द्वारा लिए गए निर्णय का स्वागत किया है। क्योंकि पानी बांग्लादेश के लिए एक बड़ा मुद्दा है और यदि पद्मा बैराज बनाया जाता है, तो लोगों को बहुत अधिक लाभ होगा।'
(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)
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