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ब्राजील चुनाव में ट्रंप का दखल: क्या विपक्षी नेता बोल्सोनारो के पक्ष में माहौल बना रहे थे अमेरिकी अधिकारी?

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:34 AM (IST)

अमेरिकी विदेश विभाग के दो शीर्ष अधिकारियों पर ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में बोलसोनारो परिवार को सत्ता में लाने के लिए एक गुप्त अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगा है।

क्या विपक्षी नेता बोल्सोनारो के पक्ष में माहौल बना रहे थे अमेरिकी अधिकारी?(फोटो: रॉयटर्स)

क्या विपक्षी नेता बोल्सोनारो के पक्ष में माहौल बना रहे थे अमेरिकी अधिकारी?(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, ब्रासीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग के दो शीर्ष अधिकारियों पर ब्राजील के दक्षिणपंथी बोलसोनारो परिवार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए एक गुप्त अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगा है।

प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले 10 वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस खुफिया अभियान के तहत ऐसे कड़े प्रतिबंधों और रणनीतिक कदमों की वकालत की गई थी, जिसका सीधा मकसद मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की राह में रोड़े अटकाना और चुनावी मुकाबले को सीनेटर फ्लावियो बोलसोनारो के पक्ष में मोड़ना था।

अभियान के पीछे कौन से अमेरिकी अधिकारी शामिल?

इस अभियान से जुड़े दो मुख्य अधिकारी डैरेन बीटी और रिकार्डो पीटा हैं। डैरेन बीटी पश्चिमी गोलार्ध मामलों के वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर ब्राजील नीति की निगरानी कर रहे थे, जबकि रिकार्डो पीटा को इस वर्ष पदोन्नत कर उत्तरी अमेरिका का उप-सहायक सचिव बनाया गया था।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वे व्हाइट हाउस या विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सीधे आदेश पर काम कर रहे थे या नहीं। पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के करीबी रहे डोनल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक तौर पर किसी भी ब्राजीलियाई उम्मीदवार का खुला समर्थन नहीं किया है।

पिता जेल गए, तो बेटे के समर्थन में जुटे अधिकारी

चुनावी अभियान शुरू होने से पहले ही दोनों अधिकारियों ने अमेरिकी राजनयिकों से कहा था कि वाशिंगटन की नीति जायर बोलसोनारो को फिर से सत्ता में बहाल करने की है। 2022 में लूला से चुनाव हारने के बाद जायर बोलसोनारो पर तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप लगे थे और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

सितंबर 2025 में जब पूर्व राष्ट्रपति को 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई, तब इन अधिकारियों ने अपना समर्थन उनके बेटे फ्लावियो बोलसोनारो की ओर मोड़ दिया। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को यह निर्देश भी दिए थे कि वे ब्राजील के अन्य रूढ़िवादी दावेदारों के साथ बातचीत न करें।

लूला को कमजोर करने के लिए प्रतिबंधों का सहारा

अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल से ही अमेरिकी नीति को इस तरह मोड़ने की कोशिश की गई जिससे राष्ट्रपति लूला की स्थिति कमजोर हो और बोलसोनारो परिवार को सियासी फायदा पहुंचे।

इसके लिए ब्राजील के प्रमुख आपराधिक गिरोहों प्रिमेइरो कोमांडो दा कैपिटल (पीसीसी) और कोमांडो वर्मेलो (सीवी) को आतंकवादी संगठन घोषित करने का दबाव बनाया गया।

साथ ही जायर बोलसोनारो के खिलाफ अदालती जांच का नेतृत्व करने वाले ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट जज एलेक्जेंडर डी मोरेस पर प्रतिबंध लगाने की भी पुरजोर पैरवी की गई।

टैरिफ की रणनीति का उल्टा असर

डैरेन बीटी पहले भी विवादों में रहे हैं और उन्हें 2018 में व्हाइट हाउस के भाषण लेखक पद से हटा दिया गया था। उन्होंने फ्री स्पीच डिप्लोमेसी का विचार आगे बढ़ाया, जिसके तहत उन देशों और अधिकारियों को दंडित करने की बात कही गई जो दक्षिणपंथी आवाजों पर रोक लगाते हैं।

वाशिंगटन ने जज मोरेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों को जेल भेजकर और अमेरिकी प्लेटफॉर्मों पर रोक लगाकर अभिव्यक्ति की आजादी का हनन किया।

साल 2025 में बोलसोनारो परिवार ने मोरेस पर अमेरिकी मानवाधिकार कानून के तहत प्रतिबंध लगवाने के लिए लॉबिंग की थी। इसके बाद जुलाई 2025 में मोरेस पर प्रतिबंध लगे, सुप्रीम कोर्ट के आठ जजों के वीजा रद किए गए और ब्राजील के सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया गया।

विश्लेषकों के अनुसार, इन सख्त कदमों से बोलसोनारो का मुकदमा नहीं रुका, बल्कि जवाबी असर यह हुआ कि ब्राजील में लूला की लोकप्रियता और बढ़ गई। बाद में अमेरिका ने टैरिफ में ढील दी, दिसंबर में मोरेस को प्रतिबंध सूची से चुपचाप हटा दिया।

मार्च में ब्राजील ने बीटी के जेल में बोलसोनारो से मिलने पर रोक लगा दी। हाल ही में पहले दौर के मतदान में फ्लावियो को मिली मामूली बढ़त को ट्रंप ने बड़ी जीत करार दिया था।

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