'असली खतरा, असली जरूरत', सर्दियों से पहले पैट्रियट मिसाइलें क्यों मांग रहे जेलेंस्की?
कड़ाके की ठंड और रूस के ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमलों के बीच, यूक्रेन को नागरिकों की जान बचाने और ...और पढ़ें
-1793434753028_m.webp)
रूस से लड़ने में यूक्रेन की जरूरत।
HighLights
यूक्रेन को सर्दियों से पहले पैट्रियट मिसाइलों की तत्काल आवश्यकता।
रूस ऊर्जा और जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे पर कर रहा हमला।
पश्चिमी देश तत्काल सहायता देने में दुविधा का सामना कर रहे।
डिजिटल डेस्क, कीव। रूस और यूक्रेन के बीच बीते चार साल से ज्यादा समय से जारी भीषम संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। संघर्ष विराम की कोशिशें, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत सभी एक साथ मट्टीपलित होती नजर आ रही है।
दूसरी तरफ जैसे-जैसे कड़ाके की ठंड नजदीक आ रही है, यूक्रेन के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसकी वजह है कि रूस ने यूक्रेन के बिजलीघरों, हीटिंग सिस्टम और पानी की सप्लाई जैसे अहम बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं।
यूक्रेन की जरूरत...
अब इन हमलों से बचने के लिए यूक्रेन को अमेरिकी 'पैट्रियट' एयर डिफेंस सिस्टम और उसकी मिसाइलों PAC-3 और PAC-2 की सख्त और तत्काल जरूरत है, क्योंकि रूस की तेज रफ्तार बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता सिर्फ इसी सिस्टम में है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की की मांग- आज चाहिए, सालों बाद नहीं...
वहीं इस मामले में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि सरकार को सर्दियों के इन कठिन महीनों में लोगों की जान बचाने के लिए तुरंत मदद चाहिए। बता दें कि हाल ही में 500 पैट्रियट मिसाइल देने के प्रस्ताव पर बात तो हुई है, लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है कि इसकी डिलीवरी शुरू होने में अभी कई साल लग सकते हैं।
क्या चाहता है यूक्रेन?
ऐसे में जेलेंस्की का तर्क है कि अगर मिसाइलें कई साल बाद मिलेंगी, तो इस सर्दियों में यूक्रेन के लाखों लोग बिजली, पानी और ठंड के बिना बेसहारा हो जाएंगे।यूक्रेन की मांग है कि अमेरिका और उसके यूरोपीय देश अपने मौजूदा गोदामों से तुरंत मिसाइलें दें और बाद में नई फैक्ट्रियों से अपना स्टॉक दोबारा भर लें।
यूक्रेन की मदद में कहां फंसा यूरोप?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यूरोप के देश, जो अब तक यूक्रेन की खुलकर मदद करते आए हैं, खुद एक बहुत बड़ी दुविधा में फंस गए हैं। इसकी बड़ी वजह है कि जर्मनी, नीदरलैंड और पोलैंड जैसे देशों ने पहले ही अपने पास से पैट्रियट सिस्टम और मिसाइलें यूक्रेन को दे दी हैं। अब उनके रक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा और नाटो (NATO) के नियमों के तहत अपनी सीमा तक पहुंच चुके हैं।
-1793434666565.webp)
खुद की सुरक्षा की चिंता भी तो है
अब दूसरी तरफ पोलैंड और जर्मनी जैसे देशों का मानना है कि यदि वे अपना सारा स्टॉक यूक्रेन को दे देंगे, तो उनके अपने देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, खासकर तब जब आए दिन रूसी मिसाइलें और ड्रोन उनकी सीमाओं के पास मंडराते रहते हैं।
पश्चिम एशिया का भी एक आधार है
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि पश्चिम एशिया में ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के चलते भी अमेरिकी मिसाइलों और हथियारों की मांग पूरी दुनिया में बढ़ गई है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव और अधिक बढ़ गया है।
आर्थिक संकट और रूस की रणनीति भी समझिए
अब ध्यान देने वाली बात यह है कि यूक्रेन की यह लड़ाई सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आर्थिक संकट भी जुड़ा हुआ है। इसको ऐसे समझिए कि युद्ध के कारण रूस से मिलने वाली गैस और ऊर्जा सप्लाई बंद हो चुकी है।
-1793434684928.webp)
जर्मनी समेत पूरे यूरोप में ऊर्जा के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ रहा है। ऐसे में लंबे समय तक भारी सैन्य और वित्तीय मदद जारी रखना यूरोपीय देशों के लिए भी मुश्किल होता जा रहा है।
रूस कहां हैं और उसका फायदा क्या है?
देखिए चार साल से ज्यादा समय जारी इस संघर्ष पर गौर से नजर डाला जाए तो रूस की रणनीति का अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसकी वजह है कि अगर आने वाली सर्दियों से पहले यूक्रेन को पर्याप्त एयर डिफेंस नहीं मिला, तो रूस लगातार ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर यूक्रेन के जनजीवन को पूरी तरह ठप कर देगा। इसके अलावा, पश्चिमी देशों के बीच हथियारों के बंटवारे और खर्च को लेकर बढ़ रही खींचतान का फायदा भी रूस उठाने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल स्थिति यह है कि यूक्रेन एक-एक मिसाइल के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में आने वाला समय इस बात की परीक्षा होगी कि क्या पश्चिमी देश आपसी सीमाओं और आर्थिक संकट के बावजूद समय रहते यूक्रेन को जरूरी सुरक्षा कवच दे पाते हैं या नहीं? अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इस कड़ाके की ठंड में यूक्रेन का आम जनजीवन और उसकी ऊर्जा व्यवस्था बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच सकती है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।