ओस्लो, एपी। नार्वे की राजधानी ओस्लो में रविवार को अफगानी नागरिकों के विरोध के बीच तालिबानी प्रतिनिधिमंडल, पश्चिमी सरकार के अधिकारियों व सिविल सोसायटी प्रतिनिधियों के बीच अफगानिस्तान में खराब होते मानवीय हालात के मुद्दे पर तीन दिवसीय वार्ता शुरू हुई। इस दौरान तालिबानी प्रतिनिधिमंडल की अफगानिस्तान व प्रवासी अफगानी महिला अधिकार तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से मुलाकात तय है। तालिबानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी कर रहे हैं।

वार्ता की शुरुआत से पूर्व तालिबान के संस्कृति व सूचना उप मंत्री ने मुत्ताकी का एक वायस मैसेज ट्वीट किया। इसमें मुत्ताकी ने एक अच्छी यात्रा की उम्मीद जताई और नार्वे को धन्यवाद दिया जो तालिबान व यूरोप के बीच अच्छे रिश्तों की शुरुआत का प्रवेश द्वार साबित हो सकता है। अगस्त में अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान पहली बार बातचीत के लिए किसी यूरोपीय देश पहुंचा है। नार्वे के अधिकारियों के साथ बाचतीत के दौरान मुत्ताकी अफगानिस्तान की खराब होती मानवीय स्थिति का हवाला देते हुए 10 अरब डालर की राशि को जारी करने की मांग रखेंगे, जिसे अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों ने फ्रीज कर रखा है।

नार्वे के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'अफगानिस्तान में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने, समाज में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने, आर्थिक उन्नति और वहां के मानवीय हालात की बेहतरी के लिए नार्वे ने तालिबान के साथ बातचीत जारी रखा है।' नार्वे की विदेश मंत्री एनिकेन हुइटफेल्ड ने शुक्रवार को कहा था कि इस वार्ता का तालिबान सरकार की मान्यता से कोई लेनादेना नहीं है।

आइएएनएस के अनुसार, तालिबानी प्रतिनिधिमंडल के नार्वे दौरे का विरोध करते हुए अफगानिस्तान मूल के लोगों ने शनिवार को ओस्लो में जोरदार प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि तालिबानी उनके देश के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। खामा प्रेस ने प्रदर्शनकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तालिबान अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, इसलिए उसके साथ बातचीत नहीं की जानी चाहिए।

तालिबान सरकार की मान्यता को लेकर फिलहाल कुछ भी तय नहीं : अमेरिका

अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि टाम वेस्ट ने कहा है कि तालिबान सरकार को मान्यता देने का फिलहाल कोई कार्यक्रम तय नहीं है। उन्होंने बलपूर्वक कहा कि अफगानिस्तान व बाकी दुनिया के बीच संबंधों का समान्य होना, तालिबान के व्यवहार पर निर्भर करता है। एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए वेस्ट ने कहा कि अमेरिका व तालिबान में रिश्तों का सामान्य होना इतना आसान नहीं है।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan