संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा प्रहार, कहा- 'देश की संप्रभुता और तथ्यों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं'
भारत ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में देश के खिलाफ किए गए अमर्यादित, ...और पढ़ें

यूएन की रिपोर्ट में भारत पर की गई 'अस्पष्ट व निराधार" टिप्पणियों पर कड़ा प्रहार
HighLights
यूएन की रिपोर्ट में भारत पर की गई 'अस्पष्ट व निराधार" टिप्पणियों पर कड़ा प्रहार
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में 'अस्सान' और 'उत्तरी भारत' जैसे अस्पष्ट भौगोलिक संदर्भों पर बरखा ताम्रकार ने जताई कड़ी आपत्ति
बच्चों के हितों और आव्रजन नियमों पर कहा - राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून के वैध निर्णयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र। भारत ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में देश के खिलाफ किए गए अमर्यादित, "अस्पष्ट और निराधार" उल्लेखों को पूरी दृढ़ता के साथ खारिज कर दिया है।
भारत का कहना है कि टाइपिंग की गलतियों और अस्पष्ट भौगोलिक शब्दों के जरिये किसी विशेष देश पर आरोप नहीं लगाए जा सकते।
इसने दोटूक कहा कि संप्रभुता और तथ्यों से खिलवाड़ कदापि बर्दाश्त नहीं। विदेश मंत्रालय में उप सचिव बरखा ताम्रकार ने इंटरैक्टिव डायलॉग के दौरान भारत का पक्ष रखते हुए रिपोर्ट की गंभीर त्रुटियों और तथ्यात्मक खामियों को जोरदार तरीके से उजागर किया।
भारत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि रिपोर्ट के पैरा 27 (फुटनोट 32) में "अस्सान और उत्तरी भारत (नॉर्दर्न इंडिया)" जैसे अस्पष्ट और गैर-कानूनी भौगोलिक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
भारत ने स्पष्ट किया कि "अस्सान" देश का कोई राज्य या मान्यता प्राप्त क्षेत्र नहीं है, और यदि इशारा 'असम' की तरफ है, तो उसे सटीकता से दर्ज किया जाना चाहिए। देश-विशिष्ट गंभीर आरोपों को इस तरह की टाइपिंग की गलतियों और बिना किसी पुख्ता संदर्भ (जैसे दिनांक, कानून या मामले) के आधार पर कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही, बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर भारत ने कहा कि बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन यह हर मामले में सार्वजनिक व्यवस्था, सीमा प्रबंधन और आव्रजन कानूनों के वैध निर्णयों को स्वतः ही ओवरराइड नहीं करता।
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि अनियमित प्रवासन को केवल एक कमजोरी नहीं माना जा सकता, यह आव्रजन कानूनों का सीधा उल्लंघन भी है।
भारत ने तीन अहम सुधारों की मांग की - देश के संदर्भ सटीक और सत्यापन योग्य होने चाहिए, सिफारिशों को बाध्यकारी संधियों से अलग रखा जाना चाहिए, और मानवाधिकार वकालत हमेशा तथ्यों तथा संप्रभुता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। भारत ने यूएन के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
