यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'मुझे गोली मार दो और यही दफना दो', हिंसक आंदोलन के बाद सेना से बोली थीं शेख हसीना; मिले थे केवल 45 मिनट
बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलन के दौरान सेना ने शेख हसीना पर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बनाया ...और पढ़ें

HighLights
- जुलाई-अगस्त में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे
- विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ थे प्रदर्शन
- हसीना को इस्तीफा देने का सुझाव दिया था
आईएएनएस, ढाका। बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलन के चलते गत वर्ष पांच अगस्त को शेख हसीना की अगुआई वाली अवामी लीग सरकार का पतन हो गया था। उस समय हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। तब से वह भारत में हैं।
अब यह बात सामने आई है कि उस समय हिंसा के दौरान जब सेना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए हसीना पर दबाव बनाया था तब उन्होंने अधिकारियों पर भड़कते हुए कहा था, 'मुझे गोली मार दो और यहीं (पीएम आवास गणभवन) दफना दो।'
मुख्य अभियोजक कोर्ट में बताया
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में हसीना से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने अपदस्थ प्रधानमंत्री के बारे में यह बात उजागर की।
उन्होंने गत जुलाई में आंदोलन के दौरान चांखरपुल इलाके में मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के संबंध में एक औपचारिक आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें 500 ज्यादा लोग मारे गए थे। देश में सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ जुलाई-अगस्त में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
सेना ने दिए थे 45 मिनट
- इस्लाम ने चार-पांच अगस्त के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि पीएम आवास में तनावपूर्ण माहौल में बैठकों का दौर चल रहा था। इनमें मंत्रियों और सत्तारूढ़ पार्टी के शीर्ष नेताओं के अलावा सेना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया था। मध्यरात्रि में सशस्त्र बलों के प्रमुखों के साथ एक बैठक में रक्षा सलाहकार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) तारीक अहमद सिद्धीक ने हसीना को इस्तीफा देने का सुझाव दिया।
- इसके बाद सुबह एक अन्य बैठक में आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन ने हसीना को बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पुलिस हालात संभाल नहीं सकती। हथियार और गोला-बारूद खत्म हो गए हैं। इसके बाद सेना ने हसीना पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा दिया।
- इस पर उन्होंने कहा था, 'फिर मुझे गोली मार दो और यहीं गणभवन में दफना दो।' सेना ने उन्हें देश छोड़ने के लिए केवल 45 मिनट दिए थे। उस समय हजारों छात्र और लोग गणभवन की ओर बढ़ रहे थे।
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