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सऊदी अरब ने सेना के विमानों से हूती विद्रोहियों के पास पहुंचाए 1 अरब डॉलर, हमले रोकने की अपील

Published: Tue, 27 Oct 2026 11:05 AM (IST)

सऊदी अरब ने यमन के हूती समूह को युद्धविराम और अपने हमलों को रोकने के लिए ईरान की मध्यस्थता से 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है।

ईरान की मध्यस्थता से युद्धविराम की कोशिश।

ईरान की मध्यस्थता से युद्धविराम की कोशिश।

HighLights

  1. सऊदी अरब ने हूतियों को 1 अरब डॉलर की पेशकश की।

  2. ईरान की मध्यस्थता से युद्धविराम का प्रयास किया जा रहा।

  3. तेहरान में क्षेत्रीय नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

डिजिटल डेस्क, यरुशेलम। इजरायली मीडिया ने खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब ने यमन के हूती समूह को 1 अरब डॉलर देने की पेशकेश की है।

यह पेशकश ईरान की मध्यस्थता में हुई एक व्यवस्था के तहत की गई है जिसका मकसद युद्धविराम कराना और सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को रोकना है।

सैन्य विमान से नकद ले जाने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान संभावित युद्धविराम पर बातचीत के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे थे। इस प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान के माध्यम से हूती समूह को 1 अरब डॉलर दिए जाने की योजना है।

राजनयिक सूत्रों ने दावा किया कि सऊदी मंत्री यह धनराशि हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमान में लेकर तेहरान पहुंचे थे। हालांकि, सऊदी अरब के आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कोई रकम सीधे ट्रांसफर की गई है या नहीं।

तेहरान बैठक में तुर्किए के खुफिया चीफ और पाक सेना प्रमुख शामिल

तेहरान में आयोजित इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के शीर्ष अधिकारी एक मेज पर नजर आए। खबरों के मुताबिक, इस बातचीत में तुर्किए के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शामिल हुए।

इनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के महासचिव मोहसेन रेजाई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

साथ ही सऊदी के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और 'मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन' के सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह दौरा मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना, बातचीत को बढ़ावा देना और कतर व पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयासों को समर्थन देना है।

विवाद का कारण तीन साल पुराने समझौते की शर्त

इजरायली मीडिया से बात करते हुए सऊदी अधिकारी ने रकम ट्रांसफर होने की खबर की पुष्टि तो नहीं की लेकिन ये स्पष्ट किया कि विवाद का मुख्य कारण तीन साल पुराने समझौते की शर्त है।

पूर्व समझौतों के तहत सऊदी अरब को हूती समूह के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और नागरिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देनी थी, जिसके बदले में हूती विद्रोहियों को हमले पूरी तरह बंद करने थे।

हूती विद्रोहियों का आरोप है कि रियाद ने समझौते का पालन नहीं किया। वहीं सऊदी अरब का स्पष्ट रुख है कि वह किसी भी सैन्य ब्लैकमेल के दबाव में आकर युद्धविराम नहीं करेगा। रियाद की शर्त है कि फंडिंग तभी दी जाएगी जब हूती यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से छीने गए महत्वपूर्ण क्षेत्रों को वापस सौंपेंगे।

होर्मुज में तेल टैंकर पर हमले बने बातचीत की वजह

रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल सुविधाओं पर बढ़ते हमलों के बीच ईरान ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की। इन हमलों की वजह से सऊदी अरब को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए हमलों ने खाड़ी क्षेत्र से तेल के निर्यात को बाधित कर दिया है, जिससे इलाके में अस्थिरता और बढ़ गई है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में इस दौरे के बारे में कहा, 'रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का तेहरान दौरा, नाटो-शैली के इस गठबंधन के प्रयासों का हिस्सा है। इसका मकसद मौजूदा संकट से जुड़े पक्षों के बीच तनाव कम करना, बातचीत और राजनयिक समाधान को बढ़ावा देना, तथा कतर और पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करना है।'

ये बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ा हुआ है। ईरान ने क्षेत्रीय ताकतों के नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे को बढ़ावा देते हुए क्षेत्र में अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश की है।

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