ताइपे, एपी। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चुनाव जीतने के बाद यहां अमेरिकी राजनयिक विलियम ब्रेंट क्रिस्टेंसेन से मुलाकात की। ताइवान में अमेरिकी इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टेंसेन ने उन्हें जीत की बधाई दी जबकि साई ने समर्थन देने के लिए उन्हें शुक्रिया अदा किया।

साई ने इस मुलाकात के दौरान कहा, ताइवान और अमेरिका की भागीदारी द्विपक्षीय स्तर से बढ़कर वैश्विक स्तर पर पहुंच गई है। भविष्य में हम वैश्विक मुद्दों पर अपने संबंधों को मजबूत करने का काम जारी रखेंगे। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद अपने भाषण में साई ने चीन से बिना पूर्व शर्त के वार्ता फिर शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'आज मैं बीजिंग के अधिकारियों को फिर याद दिलाना चाहती हूं कि शांति, समता, लोकतंत्र और संवाद स्थिरता की कुंजी है। बीजिंग के अधिकारी इस बात को जान लें कि लोकतांत्रिक ताइवान और उसकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार कभी खतरों को स्वीकार नहीं करेगी।'

आर्थिक मंदी और हांगकांग में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच साई की जीत चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के लिए झटका मानी जा रही है। वर्ष 1949 में गृहयुद्ध के दौरान चीन से अलग होने के बाद से ताइवान ने अपनी अलग पहचान बनाई है लेकिन कभी औपचारिक रूप से स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की। चीन अब भी 2.3 करोड़ की आबादी वाले ताइवान पर संप्रभुता का दावा करता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता है।

हमारा हिस्सा है ताइवान: चीन

साई की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा, हमारा पूरा विश्वास है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक चीन सिद्धांत का पालन करना जारी रखेगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ताइवान में जमीनी स्तर पर क्या बदलाव होंगे। पूरे विश्व में केवल चीन है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है। ताइवान चीन का ही हिस्सा है और यह स्थिति कभी नहीं बदल सकती।

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