नीदरलैंड्स, न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस। नीदरलैंड की डच सरकार ने सामान्य रूप से बीमार बच्चों का जीवन खत्म करने के लिए डॉक्टरों को इजाजत दे दी है। अब वो अपने तरीके से ऐसे बीमार बच्चों का जीवन खत्म कर सकेंगे जिससे उनको समस्या न हो। सरकार के इस निर्णय से चिकित्स क्षेत्र में इस तरह की मृत्यु दिए जाने के बाद बहस भी छिड़ गई है।

दरअसल नीदरलैंड की सरकार पहले से ही चिकित्सा सहायता से ऐसे लोगों को मौत देने की पक्षधर रही है जो काफी गंभीर रूप से बीमार है और उनके ठीक होने की संभावना बिल्कुल खत्म हो जाती है। चिकित्सा सहायता से ऐसे लोगों को मौत दी जाती है जिनकी उम्र 12 साल या उससे कम होती है। इसी के साथ इसमें माता-पिता की सहमति भी आवश्यक मानी जाती है। मंगलवार को संसद को लिखे एक पत्र में डच स्वास्थ्य मंत्री ह्यूगो डी जॉन्ग ने एक और 12 साल की आयु के बच्चों को शामिल करने के लिए कानून का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा जो मर रहे हैं और पीड़ित हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ह्यूगो डी जॉन्ग ने अपने पत्र में ये भी लिखा है कि कुछ बच्चे बहुत बीमार होते हैं उनमें किसी तरह से सुधार की उम्मीद नहीं होती है, वो अनावश्यक रूप से पीड़ित होते हैं। हर साल ऐसे लगभग 5 से 10 बच्चे प्रभावित होते हैं। नीदरलैंड के डॉक्टरों ने चिंता व्यक्त की है कि अगर उन्हें 1 से 12 साल के बच्चों को "लाइलाज रूप से बीमार" बच्चों की ज़िंदगी खत्म करने में मदद करने के लिए अपराधी ठहराया जा सकता है, क्योंकि कानून में उन बच्चों के लिए कोई प्रावधान नहीं था जिनकी उम्र कम होने की आशंका है।

वर्तमान कानून के तहत, एक डॉक्टर एक साल से छोटे बच्चे के जीवन को समाप्त कर सकता है मगर उसके लिए बच्चे के माता-पिता की सहमति जरूरी है। यदि कोई बच्चा "असहनीय और निराशाजनक पीड़ा" का सामना कर रहा है तो उसे ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तीन अन्य यूरोपीय देश - लक्ज़मबर्ग, बेल्जियम और स्विटज़रलैंड - चिकित्सक-सहायता प्राप्त मृत्यु की अनुमति देते हैं, हालांकि कानून प्रत्येक देश में भिन्न होते हैं।  

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