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नेपाल त्रासदी: छह गुना चौड़ी हुई त्रिशूली नदी निगल गई गांवों के गांव, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा खौफनाक मंजर

Published: Fri, 04 Sep 2026 06:47 PM (GMT+05:30)

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आए भीषण हिमस्खलन और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचाई है, जिससे त्रिशूली नदी ने अपना बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल लिया है।

त्रिशूली नदी का विकराल रूप।

त्रिशूली नदी का विकराल रूप।

डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आए भीषण हिमस्खलन और मलबे के सैलाब ने भयानक तबाही मचाई है। चंद घंटों में हरे-भरे पहाड़ी इलाके मलबे और कीचड़ के विशाल मैदान में बदल गए, जिसके जख्म आज दसवें दिन बाद भी उतने ही गहरे हैं।

ऐसे में अब सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने इस प्रलय का एक और खौफनाक सच उजागर किया है। पूरी बात को ऐसे समझिए कि आपदा का मलबा ढोने वाली त्रिशूली नदी ने अपना विकराल रूप दिखाते हुए बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल लिया है और नदियां अपनी सामान्य चौड़ाई से कई गुना फैलकर तबाही के नए निशान छोड़ गई हैं।

तो ऐसे फैली ये तबाही...

नेपाल सेना के मुताबिक, तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर रासुवा जिले के टिमुरे और स्याब्रूबेसी इलाकों में पानी का स्तर अचानक बढ़ने से भारी तबाही हुई। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि इस पूरे आपदा में जिस त्रिशूली नदी ने इस विनाशकारी मलबे को ढोया, उसने अपना बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल दिया है और नदियां अपनी सामान्य चौड़ाई से कई गुना फैल गई हैं।

nepali trishuli river (2)

सैटेलाइट तस्वीरों में पूरे सच उजागर

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि बाढ़ के बाद नदियां किस तरह विकराल रूप ले चुकी हैं। 

  • टिमुरे (रासुवा)- आपदा से पहले यहां त्रिशूली नदी की चौड़ाई मात्र 78 मीटर थी, जो बाढ़ के बाद बढ़कर 350 मीटर (यानी चार गुना से अधिक) चौड़ी हो गई।
  • स्याब्रूबेसी (रासुवा)- यहां नदी की मूल चौड़ाई 65 मीटर थी, जो बढ़कर 300 मीटर हो गई। इस इलाके में बाढ़ लगभग 300 घरों को अपने साथ बहा ले गई।
  • चौपथोके (नुवाकोट)- नुवाकोट के इस इलाके में नदी ने सबसे ज्यादा विकराल रूप लिया। बाढ़ से पहले यह 65 मीटर चौड़ी थी, जो बढ़कर 6 गुना यानी 443 मीटर चौड़ी हो गई।
  • बत्तार (नुवाकोट)- यहां नदी की चौड़ाई 91 मीटर से बढ़कर 309 मीटर हो गई।

nepali trishuli river (1)

चमत्कारिक बचाव और नुकसान के आंकड़े

गौरतलब है कि नेपाल में राहत और बचाव अभियान का आज दसवां दिन है। इस बीच, त्रिशूली-3 'A' हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर फंसे दो मजदूरों को आज सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिसे विशेषज्ञ किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

मौत और लापता लोगों के आंकड़े

इस भीषण आपदा से नेपाल में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5083 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं बात अब चीन की करें तो सरकारी मीडिया के अनुसार, 21 लोगों की मौत हुई है और 541 लोग लापता हैं।

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