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नेपाल त्रासदी: बिना शव के नहीं बन रहा डेथ सर्टिफिकेट, परिजनों की मांग- लापता लोगों को मृत घोषित करे सरकार

Published: Fri, 18 Sep 2026 09:08 AM (IST)

नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ में लापता हुए लोगों के परिवार सरकार से उन्हें मृत घोषित करने के लिए ...और पढ़ें

लापता लोगों के परिवार मृत घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

लापता लोगों के परिवार मृत घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

HighLights

  1. लापता लोगों के परिवार मृत घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

  2. शव न मिलने से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे।

  3. मुआवजा, बीमा क्लेम जैसे लाभ रुके हुए हैं।

डिजिटल डेस्क, काठमाण्डू। नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ में लापता लोगों के परिवारों ने सरकार से उन्हें मृत घोषित करने के लिए एक तेज कानूनी प्रक्रिया बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि शव और मृत्यु प्रमाण पत्र न होने के कारण मुआवजा, बीमा क्लेम, बैंक से जुड़ी सुविधाएं, विरासत और संपत्ति के ट्रांसफर जैसे काम रूके हुए हैं।

यह मांग और तब तेज हो गई जब अधिकारियों ने लापता लोगों की संख्या 5,179 से बढ़ाकर 6,150 कर दी, जबकि मरने वालों की संख्या 1,403 थी और इनमें से अभी केवल 158 शवों की पहचान हो पाई थी।

परिवारों ने कुशा घास के पुतले का किया अंतिम संस्कार

नेपाल त्रासदी में लापता हुए कुछ लोगों के परिवार और रिश्तेदार अब उनके मिलने की उम्मीद खो चुके हैं, जिसके बाद उन्होंने शव नहीं मिलने की स्थिति में कुशा घास से पुतले बनाकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया है। हालांकि कानूनी तौर पर वे अभी भी राहत और वित्तीय निपटान के लिए जरूरी मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

लोगों ने साझा किया अपना अनुभव

प्रेम पोखरेल के छोटे भाई दुर्गा प्रसाद तिमुरे में इमिग्रेशन ऑफिस में काम करते समय लापता हो गए थे। प्रेम पोखरेल ने जानकारी देते हुए बताया, 'वो नहीं मिले हैं। मुझे नहीं लगता है कि वो जीवित हैं।'

वहीं नुवाकोट की सबित्री तमांग ने कहा, 'कानूनी अड़चन के कारण परिवार अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं ले पा रहे हैं। उनके वार्ड ऑफिस ने उन्हें बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना कुछ भी जारी नहीं किया जा सकता है।

लापता को मृत घोषित करने की क्या है प्रक्रिया

नेपाल का सिविल कोड आम तौर पर किसी ऐसे व्यक्ति को मृत मानने की अनुमति देता है जो लगातार 12 सालों से लापता है। हालांकि धारा 40 (4) रिश्तेदारों को न्यायिक मृत्यु घोषणा की मांग करने की अनुमति देती है।
जब कोई व्यक्ति किसी आपदा या दुर्घटना में लापता हो जाता है या उसके मारे जाने की आशंका होती है, तो अदालत बिना शव के भी ऐसा आदेश जारी कर सकती है। लेकिन ऐसा तभी होता है जब हालात साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हों।

लापता लोगों के परिवार को अधिकारियों का साथ

नुवाकोट के मुख्य जिला अधिकारी शंभू प्रसाद रेग्मी ने परिवारों की अनिश्चितता को स्वीकार किया और कहा कि अधिकारियों ने उन लापता लोगों के परिवारों को भी वही सुविधाएं देने पर चर्चा की है जो मृतक के परिवारों को मिलती हैं। 

वहीं उत्तरगया ग्रामीण नगर पालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जयराम उप्रेती ने कहा कि वार्ड ऑफिस के पास अभी शव मिलने और उसकी पहचान होने के बिना मृत्यु से जुड़े दस्तावेज जारी करने का अधिकार नहीं है। परिवार और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित हजारों परिवारों को अलग-अलग अदालतों में जाने के लिए कहना एक और महंगी और लंबी प्रक्रिया होगी।

26 अगस्त को नेपाल में क्या हुआ था?

26 अगस्त 2026 को नेपाल-चीन सीमा के पास लावतंग लिरुंग पर्वत श्रृंखला पर एक भीषण प्राकृतिक आपदा आई थी। लगभग 5,150 मीटर की ऊंचाई पर चट्टान और ग्लेशियर की बर्फ का एक बहुत बड़ा हिस्सा गिर गया। इस भारी लैंडस्लाइड से निकली ऊर्जा के कारण भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए थे।

बर्फ पिघलने और मलबा त्रिशूली और भोटे कोशी नदियों में गिरने से भयानक मलबे और पानी का सैलाब बह निकला। जो लगभग 188 किमी/घंटा की गति से नीचे की बस्तियों में जा घुसा। इस आपदा ने रसुवागढ़ी सीमा, तिमरे और आस-पास के कई गांवों, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, सड़कों और पुलों को पूरी तरह तबाह कर दिया। वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में तापमान वृद्धि के कारण ग्लेशियर पिघलने और परमाफ्रॉस्ट के कमजोर होने से यह पर्वत ढलान खिसकी थी

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