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नेपाल में 200 KM लंबे नदी क्षेत्र के मुर्दाघर फुल, बहकर यूपी पहुंचे 7 शव

Published: Sat, 29 Aug 2026 12:27 PM (GMT+05:30)

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद 200 किलोमीटर लंबे नदी मार्ग पर मुर्दाघर भर गए हैं, जिससे शवों को एक जिले से दूसरे जिले में भेजना पड़ रहा है।

नेपाल में बाढ़ के बाद 200 किलोमीटर लंबे नदी मार्ग पर मुर्दाघर फुल(फाइल फोटो)

नेपाल में बाढ़ के बाद 200 किलोमीटर लंबे नदी मार्ग पर मुर्दाघर फुल(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, काठमांडू। बुधवार को नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बाद हालात बेहद भयावह हो गए हैं। मध्य और दक्षिणी नेपाल में 200 किलोमीटर लंबे भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी मार्ग पर स्थित मुर्दाघर पूरी तरह से भर चुके हैं और उनकी क्षमता जवाब दे गई है।

बाढ़ में बह गए लोगों के शव जैसे-जैसे नदी के निचले इलाकों में मिल रहे हैं, प्रशासन को मजबूरी में शवों को एक जिले से दूसरे जिले में भेजना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि सरकारी इमारतों और सामुदायिक भवनों को अस्थायी मुर्दाघरों में तब्दील करना पड़ा है।

भारतीय सीमा तक पहुंचा असर

नदियों का जलस्तर नेपाल की सीमा पार कर भारत तक पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह तक, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक नदी से सात अज्ञात शव बरामद किए गए।

नेपाल से सटे यूपी के महाराजगंज जिले में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने मोटरबोट की मदद से तीन महिलाओं और एक पुरुष के शव निकाले। वहीं, पड़ोसी जिले कुशीनगर में गंडक नदी के छितौनी तटबंध के पास से तीन अन्य शव बरामद किए गए।

नेपाल ने रसुवा से लेकर भारतीय सीमा पर स्थित चितवन और अन्य संभावित स्थानों पर नदी के किनारों पर सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। जिलों में शव रखने की जगह खत्म होने के बाद, नेपाल के गृह मंत्रालय ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी के प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि शवों को सुरक्षित रखने और उनकी पहचान की व्यवस्था की जा सके।

नेपाल गृह मंत्रालय की संयुक्त प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी ने कहा कि जहां भी शव मिल रहे हैं, उनके उचित प्रबंधन को लेकर समन्वय किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है।

चितवन में सबसे अधिक 221 शव बरामद

भारतीय सीमा के करीब नारायणी नदी पर स्थित चितवन सबसे बड़े संकट के रूप में उभरा है। शुक्रवार तक इस जिले में 221 शव बरामद किए गए, जो इस बाढ़ कॉरिडोर में सबसे बड़ा आंकड़ा है।

चितवन के अस्पतालों के मुर्दाघरों में केवल 30-50 शवों को रखने की क्षमता थी। इसके चलते अधिकारियों को भरतपुर में एक खाली पड़ी सरकारी इमारत को अस्थायी शव-प्रबंधन और पहचान केंद्र में बदलना पड़ा, जिसकी क्षमता लगभग 250 शवों की है।

अधिकारियों ने शवों को सड़ने से बचाने के लिए एयरकंडीशनर और ड्राई आइस का इंतजाम किया है। अगर यह जगह भी भर जाती है, तो देवघाट के इलेक्ट्रिक श्मशान घाट को एक बैकअप विकल्प के तौर पर रखा गया है।

चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल ने बताया कि तलाशी अभियान जारी रहने के कारण शवों का प्रबंधन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर शव क्षत-विक्षत स्थिति में मिल रहे हैं, जिससे चुनौती और बढ़ गई है।

पोखरा समेत अन्य जिलों में भी जगह की कमी

जैसे-जैसे निचले इलाकों में अधिक शव मिल रहे हैं, अन्य जिलों पर भी भारी दबाव आ गया है। धाडिंग और गोरखा ने शवों को काठमांडू और पोखरा भेज दिया है। वहीं, पूर्वी नवलपरासी ने शवों को पोखरा, पाल्पा, बुटवल और भैरहवा शिफ्ट किया है और कावासोती स्थित अंकुर सामुदायिक वन हॉल को अस्थायी कोल्ड स्टोरेज में बदल दिया गया है।

शुक्रवार तक धाडिंग, गोरखा, तनहुन और पूर्वी नवलपरासी से बरामद 102 शवों को फोरेंसिक जांच के लिए पोखरा ले जाया गया। कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमान सिंह गुरुंग ने बताया कि पोखरा के मुर्दाघरों में कुल मिलाकर सिर्फ 88 शव रखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के हिसाब से हम पहले ही अपनी क्षमता पार कर चुके हैं।

पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज के अधिकारियों ने बताया कि 2 से 6 डिग्री सेल्सियस के तापमान में शवों को आमतौर पर केवल 10 दिनों से दो सप्ताह तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे अधिक समय तक भंडारण के लिए सब-जीरो सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जो वहां उपलब्ध नहीं हैं।

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