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सोशल मीडिया के बदम पर हारी बाजी को पलट ब्राजील के सिकंदर बने लूला, WhatsApp पर खड़ी की समर्थकों की फौज

Published: Sat, 31 Oct 2026 09:50 PM (IST)

लूला दा सिल्वा ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में सोशल मीडिया अभियान और जनसमर्थन से हारी हुई बाजी पलट दी।

सोशल मीडिया के बल पर हारी बाजी को पलट ब्राजील के सिकंदर बने लूला। (रॉयटर्स)

सोशल मीडिया के बल पर हारी बाजी को पलट ब्राजील के सिकंदर बने लूला। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. लूला ने सोशल मीडिया और जनसमर्थन से ब्राजील चुनाव जीता।

  2. व्हाट्सएप पर 'लूला आर्मी' ने एक करोड़ सदस्य जोड़े।

  3. मतदान के दिन नागरिकों ने मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाया।

डिजिटल डेस्क, सल्वाडोर। चुनाव में जीत सिर्फ भाषणों और रैलियों से नहीं मिलती, कभी-कभी व्हाट्सएप का एक संदेश भी निर्णायक साबित हो सकता है। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा की वापसी इसकी मिसाल बनी।

पहले दौर में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद लूला की टीम ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक ऐसा अभियान चलाया कि दूसरे दौर में बाजी पलट गई।

मतदान के दिन जब जानबूझकर बसों का संचालन रोक दिया गया तो स्थानीय लोग अपनी गाड़ियों से मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने में जुट गए। ऊबर चालकों ने भी मुफ्त सवारी दी।

व्हाट्सएप पर खड़ी हुई 'लूला आर्मी'

लूला की चुनावी वापसी में सांसद आंद्रे जैनोनेस की अहम भूमिका रही। उन्होंने व्हाट्सएप पर 'लूला आर्मी' नाम से चैनल बनाया और समर्थकों से अपने परिचितों को इससे जोड़ने की अपील की। देखते ही देखते चैनल के फालोअर्स की संख्या 50 हजार से बढ़कर एक करोड़ तक पहुंच गई। इस अभियान ने लूला के पक्ष में संदेश को तेजी से लोगों तक पहुंचाया।

राजनीतिक जोखिम सलाहकार क्रेओमार डी सूजा के मुताबिक, लूला की टीम ने बोल्सोनारो की गलतियों को मुद्दा बनाया। मतदाताओं के बीच यह संदेश पहुंचाया गया कि बोल्सोनारो ब्राजील के लोकतंत्र और सामाजिक प्रगति के लिए खतरा हैं। साथ ही, उनके सत्ता में लौटने पर लाखों गरीबों को मिलने वाली कल्याणकारी सहायता में कटौती की आशंका भी जताई गई।

बसें रुकीं तो जनता ने संभाली कमान

चुनाव के दिन बाहिया राज्य की राजधानी सल्वाडोर में मतदान केंद्रों तक मुफ्त परिवहन देने वाली बसों का संचालन रोक दिया गया। करीब 944 बसें डिपो में खड़ी रह गईं। चुनावी अदालत के विश्लेषकों के अनुसार, राज्य में उस दिन लगभग 30 प्रतिशत बसें नहीं चलीं।

शहर के मेयर ब्रूनो रेइस ने हवाला दिया कि बसों पर लूला सरकार के स्टीकर लगे हैं, इसलिए इन्हें चुनाव प्रचार माना जा सकता है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मोर्चा संभाला।

इतिहास के शिक्षक मार्टिंस माफ्रा अपनी कार से मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने में जुट गए। उनके जैसे हजारों लोगों ने स्वयंसेवक बनकर मतदान में मदद की। बसों का संचालन रोकने के मामले में अदालत ने शहर के परिवहन प्रमुख पाब्लो सूजा की गिरफ्तारी का आदेश भी दिया।

नतीजा लूला के पक्ष में

बाहिया में लूला की मजबूत पकड़ का फायदा उन्हें मिला। सल्वाडोर में उन्होंने 73 प्रतिशत वोट हासिल किए। दूसरे दौर में लूला ने करीब एक करोड़ मतों के अंतर से जीत दर्ज की। बोल्सोनारो ने नतीजों और मतदान के लिए दो घंटे अतिरिक्त समय दिए जाने पर सवाल उठाए, लेकिन संघीय चुनाव अदालत ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया।

(समाचार एजेंसी रायटर्स के इनपुट के साथ)

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