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9 साल की उम्र में छूटा देश, अकेलेपन में कटी जिंदगी और... कहानी उस राजकुमारी की जिसने झेला निर्वासन का दर्द

Published: Thu, 15 Jan 2026 07:49 PM (IST)

ईरान की राजकुमारी लैला पहलवी का जीवन निर्वासन, नुकसान और दुख से भरा रहा। 1979 की क्रांति के बाद 9 ...और पढ़ें

(कहानी लैला पहलवी की , फोटो - जागरण ग्राफिक्स)

(कहानी लैला पहलवी की , फोटो - जागरण ग्राफिक्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हर देश का अपना इतिहास होता है। इसमें राजा के उदय से लेकर पतन तक की कहानी लिखी होती है।

इस कड़ी में एक पीढ़ी ऐसी होती है जिसे अपने साम्राज्य के अंत हो भी देखना पड़ता है। ईरान की राजकुमारी लैला पहलवी भी इस बात की गवाह बनी।

राजकुमारी लैला पहलवी का जन्म 20वीं सदी के सबसे शक्तिशाली शाही परिवारों में से एक में हुआ था, फिर भी उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय उस देश से दूर बिताया जिसने उनकी पहचान बनाई थी।

ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी और महारानी फराह पहलवी की सबसे छोटी बेटी, लैला की जिंदगी तेहरान के महल के गलियारों से लेकर निर्वासन में होटल के कमरों के इर्द-गिर्द घुमती रही।

उनकी कहानी न केवल एक राजवंश के पतन को दिखाती है, बल्कि अचानक विस्थापन, नुकसान और दुख की व्यक्तिगत कीमत को भी दर्शाती है।

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लैला पहलवी का बचपन 

लैला पहलवी का जन्म 27 मार्च, 1970 को तेहरान में हुआ था। वह शाह और महारानी फराह की चौथी और सबसे छोटी संतान थीं।

उनके शुरुआती साल पहलवी दरबार की सुरक्षित दुनिया में बीते, जहां समारोह, प्राइवेट ट्यूटर, फारसी संस्कृति और इतिहास पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता था।

शाह के शासनकाल में ईरान के तेजी से आधुनिकीकरण का असर शाही परिवार पर भी पड़ा। लैला ऐसे माहौल में पली-बढ़ी जहां परंपरा और वेस्टर्न प्रभाव के बीच संतुलन था।

शानदार जिंदगी के बावजूद, परिवार के लोगों के मुताबिक वह एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की बच्ची थी, जो अपने माता-पिता और भाई-बहनों से बहुत जुड़ी हुई थी। हालांकि, वह सुरक्षित दुनिया ज्यदा समय तक नहीं चली।

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एक क्रांति जिसने सब कुछ बदल दिया

जनवरी 1979, जब शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। लोग शाही घरानों के बाहर 'शाह मुर्दाबाद' के नारे लगाने लगे, तो पहलवी परिवार ईरान से भाग गया।

उस समय लैला महज नौ साल की थी। ईरानी क्रांति ने न सिर्फ उसके पिता का शासन खत्म किया, बल्कि परिवार से नागरिकता, सुरक्षा और घर भी छीन लिया।

इसके बाद लगातार घूमने का दौर शुरू हुआ। परिवार कुछ समय के लिए मिस्र, मोरक्को, बहामास, मैक्सिको, अमेरिका और पनामा में रहा। उस दौरान उनके परिवार की हत्या की धमकियां भी मंडरा रही थीं।

सरकारें उन्हें ज्यादा समय तक अपने यहां रखने से हिचकिचा रही थीं। इस दौरान, मोहम्मद रजा शाह भी एडवांस लिंफोमा से जूझ रहे थे।

लैला के लिए, निर्वासन का मतलब था निश्चितता का अचानक खत्म हो जाना। महल की जिंदगी की दिनचर्या और सुरक्षा की जगह सुरक्षित घर, अनजान स्कूल और हमेशा रहने वाली अस्थिरता की भावना ने ले ली थी।

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निर्वासन के बाद का दर्द 

ईरान छोड़ने के दो साल से भी कम समय बाद 27 जुलाई, 1980 को शाह की काहिरा में मौत हो गई। लैला 10 साल की थी। उनकी मृत्यु एक और झटका था, जिसने वापसी की किसी भी उम्मीद पर विराम लगा दिया।

महारानी फराह ने आखिरकार परिवार को अमेरिका में बसाया, जिसका बेस ग्रीनविच, कनेक्टिकट में था। लीला ने 1988 में राय कंट्री डे स्कूल से ग्रेजुएशन करने से पहले न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई की।

बाद में वह अपना समय अमेरिका और पेरिस के बीच बांटने लगी। उन्होंने फारसी, अंग्रेजी और फ्रेंच समेत कई भाषाएं सीखी।

उन्हें एक ईरानी राजकुमारी के रूप में अपनी पहचान के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रही थी। दोस्तों और परिवार ने बाद में बताया कि वह खुद को बंधा हुआ महसूस नहीं करती थी, न तो पूरी तरह से अपने अतीत से जुड़ी थी और न ही अपने वर्तमान में सहज थी।

संघर्ष वाले दिन 

जैसे ही वह वयस्क हुई, लीला को गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वह क्रोनिक थकान सिंड्रोम, डिप्रेशन और गंभीर एनोरेक्सिया से पीड़ित थी, ऐसी स्थितियां जिनके लिए अमेरिका और यूके दोनों में बार-बार इलाज की जरूरत पड़ी।

एनोरेक्सिया और डिप्रेशन के साथ-साथ, लीला को प्रिस्क्रिप्शन दवाओं, खासकर नींद की गोलियों पर निर्भरता से भी जूझना पड़ा।

दोस्तों और परिवारवालों ने बाद में बताया कि दवाएं रिक्रिएशनल इस्तेमाल के बजाय पुरानी नींद न आने की बीमारी, चिंता और इमोशनल अकेलेपन से निपटने का एक तरीका बन गई थीं।

लैला ज्यादातर पब्लिक लाइफ से दूर रहीं, हालांकि उन्होंने कुछ समय के लिए पेरिस में एक मॉडल के तौर पर काम किया। वह अपनी एलिगेंस और संयम के लिए जानी जाती थीं।

अपने बड़े भाई रजा पहलवी के उलट, जिन्होंने निर्वासन में क्राउन प्रिंस के तौर पर एक पब्लिक पॉलिटिकल भूमिका निभाई, उनसे पूरी तरह से उलट थीं।

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लंदन में रहस्यमयी मौत

10 जून, 2001 को राजकुमारी लैला पहलवी लंदन के लियोनार्ड होटल में अपने कमरे में मृत पाई गईं। वह 31 साल की थीं।

जांच में यह नतीजा निकला कि उनकी मौत प्रिस्क्रिप्शन बार्बिट्यूरेट्स की ओवरडोज़ से हुई थी। उनके शरीर में कोकीन भी मौजूद थी। इस मौत को संभावित आत्महत्या माना गया।

उनकी मौत से उन्हें जानने वाले सभी लोग सदमे में थे, हालांकि इससे उनके लंबे समय से चल रहे संघर्षों की गहराई भी सामने आई। उन्हें ईरान से दूर पेरिस में दफनाया गया।

बाद के सालों में, परिवार को 2011 में उनके भाई प्रिंस अली रजा की मौत से एक और दुख झेलना पड़ा, जो निर्वासन में ही थे (उन्होंने आत्महत्या कर ली थी)।