नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन इन दिनों चीन की 3 दिवसीय यात्रा पर हैं। ऐसा अनुमान है कि वो चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से अमेरिकी-उत्तर कोरिया शिखर सम्मेलन के संदर्भ में बातचीत करेंगे। वह 7 से 10 जनवरी तक चीन की यात्रा पर रहेंगे। यह उनकी चौथी यात्रा है। उनकी यह यात्रा चर्चा में इसलिए है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे दोबारा मुलाकात करने की इच्छा जताई है। ऐसी उम्मीद है कि जल्द ही दोनों की मुलाकात हो सकती है। आपको बता दें कि पिछले साल सिंगापुर में ट्रंप से मुलाकात से पहले किम जोंग उन चीन दौरे पर गए थे और चिनफिंग से मुलाकात की थी। उस दौरान भी किम ने चिनफिंग से अमेरिका से होने वाली वार्ता को लेकर चर्चा की थी।

 

दरअसल जून 2018 में ऐतिहासिक सिंगापुर शिखर वार्ता के दौरान उत्तर कोरियाई तानाशाह ने अपने परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने का आश्वासन दिया था, लेकिन शर्त यह थी कि अमेरिका उनके परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों को बैन करने के लिए जो प्रतिबंध लगाए थे, उनको खत्म करे तथा सुरक्षा की गारंटी दे। हालांकि, उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं हुई थी।

अचानक 6 महीने बाद इस मामले में नया मोड़ तब आ गया जब उत्तर कोरियाई तानाशाह ने न्यू ईयर स्पीच में अमेरिका को धमकी दे डाली। उसने कहा कि अमेरिका ने दुनिया के सामने जो वादा किया था, अगर वह उस पर अमल नहीं करता है तो हमें अपने हितों की रक्षा के लिए नए तरीके से विचार करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। हालांकि, किम ने कहा था कि वे ट्रंप से मिलने के लिए हर वक्त तैयार हैं।

उत्तर कोरिया ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए अपने परमाणु हथियारों को नष्ट नहीं करने की बात कही। साथ ही, दक्षिण कोरिया को भी चेताया कि जब दोनों कोरियाई देशों के बीच रिश्ते सामान्य हो रहे हैं तो वह अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास रोक दे। उसके इस बयान से एक बार फिर कोरियाई द्वीप में शांति के प्रयासों को झटका लगा तो वहीं, अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संबंध एक बार फिर पेचीदा हो गए। हालांकि, ट्रंप ने फिर किम से मुलाकात करने के संकेत दिए हैं।

उत्तर कोरियाई तानाशाह की सनक किसी से छिपी नहीं है। उनके सनकीपन का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक मीटिंग में झपकी लेने पर किम ने अपने शिक्षा मंत्री किम योंग जिन को गोलियों से भुनवा दिया था। अमेरिका के अत्यधिक दबाव में वे अपनी सुरक्षा को लेकर आत्मघाती कदम भी उठा सकते हैं। उनको डर है कि अमेरिका सद्दाम हुसैन और मुअम्मर अली गद्दाफी की तरह उन्हें भी सत्ता से हटा सकता है। ऐसे में किम जोंग उन परमाणु ताकत हासिल करने में लगा हुआ है, ताकि अमेरिका उसके साथ सद्दाम हुसैन या गद्दाफी जैसा व्यवहार न कर सके और वे परमाणु हथियारों के बल पर अमेरिका को मैनेज कर ले।

अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए किम अपने पिता और दादा से कहीं अधिक सक्रिय हैं। उनके दादा किम सुंग ने अपने शासनकाल में 15 और पिता किम जोंग द्वितीय ने 16 मिसाइलों का परीक्षण कराया था। दिसंबर 2011 में सत्ता में आने के बाद से अब तक किम 89 मिसाइलों का टेस्ट करा चुके हैं, जिसमें कम दूरी से लेकर अंतरमहाद्विपीय मिसाइलें तक शामिल हैं, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। हॉसॉन्गण-15 मिसाइल से तो अमेरिका को सीधे खतरा है, क्योंकि उस मिसाइल की मारक क्षमता 13 हजार किलोमीटर तक हो सकती है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद किम ने उत्तर कोरिया को परमाणु संपन्न देश घोषित कर दिया था। जिसके बाद अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई।

किम जोंग उन के परमाणु हथियारों को नष्ट करने के अपने वादे से मुकरने के बाद से पूरी दुनिया की निगाहें अब ट्रंप और कोरियाई तानाशाह के बीच होने वाली दूसरे शिखर वार्ता पर टिक गई हैं। अब देखना है कि अमेरिका इस सनकी तानाशाह से कैसे डील करता है कि वह परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करे, ताकि दुनिया पर परमाणु हमले का संकट खत्म हो।

Posted By: Kamal Verma