जकार्ता, रॉयटर्स: इंडोनेशिया ने म्यांमार से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) के विशेष दूत की नियुक्ति को मंजूरी देने का आग्रह किया है। साथ ही बताया है कि म्यांमार में एक बार फिर लोकतंत्र स्थापित करने को लेकर वार्ता में आंशिक प्रगति हुई है।

आसियान से नेतृत्व का आग्रह

म्यांमार में तख्तापलट के छह महीने पूरे हो चुके है, इस बीच सोमवार को आसियान संघ के विदेश मंत्रियों ने मुलाकात की है. ताकि म्यांमार में हिंसा को समाप्त कर जुंटा और उसके विरोधियों के बीच बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया से बात करते हुए इंडोनेशिया के विदेश मंत्री ने बताया कि, म्यांमार में उथल-पुथल को रोकने के लिए समूह ने अपनी पांच-सूत्रीय योजना को लागू करने पर कोई खास प्रगति नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि देरी से आसियान संघ का कोई भला नहीं होना है। यदि इस मामले में निष्क्रियता बनी रहती है, तो इस मुद्दे को निर्देशों के लिए वापस कर दिया जाएगा।

जल्द मिलेगी प्रस्ताव को मंजूरी

इंडोनेशिया के विदेश मंत्री रेटनो मारसुडी ने उम्मीद जाहिर की है कि म्यांमार जल्द विशेष दूत की नियुक्ति को लेकर आसियान के प्रस्ताव को मंजूरी देगा। रेटनो ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि विशेष दूत के तौर पर किसे नियुक्त किया जाएगा। वहीं, म्यांमार के सैन्य शासक मिन आंग हलिंग ने रविवार को एक भाषण में कहा कि, वो थाईलैंड के पूर्व उप विदेश मंत्री वीरसाकदी फुत्रकुल की दूत के रूप में नियुक्ति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि, म्यांमार ढांचे के भीतर आसियान सहयोग पर काम करने के लिए तैयार है, जिसमें म्यांमार में विशेष दूत के साथ बातचीत भी शामिल है।

कोरोना के कारण बिगड़े हालात

गौरतलब है कि म्यांमार में एक फरवरी को हुए तख्तापलट के बाद से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर से कोरोना वायरस संक्रमण में वृद्धि ने पिछले एक महीने के दौरान स्वास्थ्य प्रणाली को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है और लोगों के लिए बड़े संकट के तौर पर सामने आई है। वहीं, अमेरिका, चीन समेत कई देशों ने म्यांमार में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आसियान संघ से राजनयिक प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए कहा है। संघ के सदस्यों में म्यांमार भी शामिल है।

Edited By: Amit Kumar