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UNHRC में भारतीय सफाई कर्मचारी की बेटी ने पाक को दिखाया आईना, कहा- देख लो दलित होकर भी PHD कर रही हूं

सरकारी छात्रवृत्ति पर स्विट्जरलैंड में पीएचडी कर रही रोहिणी ने 52वें सत्र के दौरान वंचित लोगों के उत्थान के लिए भारत की प्रशंसा की है। रोहिणी ने कहा कि पाक को देखना चाहिए कि हमारे पास एक आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु हैं और ओबीसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

By AgencyEdited By: Mahen KhannaPublished: Sat, 25 Mar 2023 06:42 AM (IST)Updated: Sat, 25 Mar 2023 06:42 AM (IST)
पीएचडी कर रही रोहिणी घावरी ने पाक को लताड़ा।

जिनेवा , एएनआई। भारत के इंदौर शहर के एक सफाई कर्मचारी की बेटी ने आज पाकिस्तान को आईना दिखाने का काम किया है। सरकारी छात्रवृत्ति पर स्विट्जरलैंड में पीएचडी कर रही लड़की ने 52वें सत्र के दौरान वंचित लोगों के उत्थान के लिए देश की प्रशंसा की है। जेनेवा में मानवाधिकार परिषद की बैठक में एएनआई से विशेष रूप से बात करते हुए रोहिणी घावरी ने कहा कि पाक झूठे आरोप ही लगाना जानता है।

संयुक्त राष्ट्र में जाने का सपना पूरा हुआ

रोहिणी ने कहा कि मुझे संयुक्त राष्ट्र में रहने का एक सुनहरा मौका मिला है। पिछले दो वर्षों से, मैं जिनेवा में पीएचडी कर रही हूं और संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरा सपना था, जो पूरा हो गया। रोहिणी ने कहा कि भारत में दलित समुदाय की स्थिति के बारे में मैं जागरूकता फैलाना चाहती हूं।

पाक को लताड़ा, कहा- भारत में हो रहा बदलाव

रोहिणी ने आगे कहा कि एक सफाई कर्मचारी की बेटी होने के नाते यह बड़ी उपलब्धि है कि हम यहां तक ​​पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के मुद्दों और दलित, आदिवासी और समाज के हाशिए के वर्गों से संबंधित अन्य लोगों को लेकर हमेशा भारत पर निशाना साधता है, लेकिन उसे अब देखना चाहिए कि भारत में बड़ा बदलाव हो रहा है, हमारे पास एक आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु हैं और ओबीसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

दलितों का हाल जानना तो मुझे देखिए- रोहिणी

उन्होंने आगे कहा एक लड़की होने के नाते यहां तक ​​पहुंचना हमेशा एक कठिन रास्ता था। एक दलित लड़की के रूप में, मुझे वास्तव में गर्व है कि मुझे यहां आने का मौका मिला। पाक पर कटाक्ष करते हुए रोहिणी ने कहा कि भारत में दलितों की स्थिति पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत बेहतर है। हमारे पास दलितों के लिए आरक्षण नीति है। यहां तक ​​कि मुझे भारत सरकार से 1 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिली और मैं एक वास्तविक उदाहरण हूं, जिसे पाक को देखना चाहिए की भारत में दलित भी कम नहीं है।


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