ढाका/गुवाहाटी, एजेंसियां। बांग्लादेश ने भारत से प्याज निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया है। आपूर्ति बाधित होने के बाद से बांग्लादेश में प्याज की कीमत आसमान छू रही है। वाणिज्य मंत्री टीपू मुंशी ने भारतीय अधिकारियों से मानवीय आधार पर इस मुद्दे पर विचार करने का आग्रह किया है क्योंकि इसकी ऊंची कीमत से आम आदमी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम छह लाख टन प्याज की कमी का सामना कर रहे हैं। इसमें 80 फीसद भारत से आता है। प्रतिबंध के बाद कीमत बेतहाशा बढ़ गई है और लोग पूछ रहे हैं कि कब यह कम होगी। बता दें कि भारत में प्‍याज की कीमतें बढ़ने के बाद सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के आर्थिक सलाहकार एकेएम मशीउर रहमान ने मंगलवार को कहा कि रैडक्लिफ रेखा को अंतिम विदाई दे देनी चाहिए क्योंकि इसने पड़ोसियों के बीच अवरोध पैदा किए हैं और दक्षिण एशिया में व्यापार एवं वाणिज्य को अवरुद्ध किया है। रहमान ने यहां दो दिवसीय भारत-बांग्लादेश हितधारक बैठक के पहले दिन अपने संबोधन में कहा कि अलगाव कोई समाधान नहीं है तथा व्यापक आर्थिक क्षेत्र में काम करने के लिए दुनिया में मजबूत साझेदार जरूरी हैं।

बता दें कि रैडक्लिफ रेखा ब्रिटिश भारत के समय के पंजाब और बंगाल के भारतीय तथा पाकिस्तानी हिस्सों के बीच सीमा निर्धारण की रेखा है। इसके रचनाकार सर साइरिल रैडक्लिफ के नाम पर इसका नाम रखा गया था।

एकेएम मशीउर रहमान ने कहा, 'रैडक्लिफ द्वारा बनाई गई सीमाओं को अंतिम विदाई दी जानी चाहिए। इस बारे में मजबूत राय है कि रैडक्लिफ से हमारी भविष्य तय नहीं होना चाहिए। हमें सीमापार लोगों को इंसान समझना चाहिए और उन्हें उचित सम्मान देना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।' उन्‍होंने कहा कि शेख हसीना राजनीति और कूटनीति को बहुत मानवीय नजरिये से देखती हैं। उन्होंने कहा कि जब भी संभावना हो हमें (भारत और बांग्लादेश को) मिलकर काम करना चाहिए।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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