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'कोई भी देश अछूता नहीं रहेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहद गंभीर खतरा', पश्चिम एशिया संकट पर बोले IEA चीफ

Published: Tue, 24 Mar 2026 02:03 AM (IST)

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से उत्पन्न ऊर्जा संकट को वैश्विक ...और पढ़ें

आइईए प्रमुख फातिह बिरोल ने दी चेतावनी। (रॉयटर्स)

आइईए प्रमुख फातिह बिरोल ने दी चेतावनी। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. IEA प्रमुख ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी।

  2. पश्चिम एशिया तनाव से इतिहास का सबसे बड़ा तेल व्यवधान।

  3. IEA ने तेल बचाने हेतु 'वर्क फ्रॉम होम' की सलाह दी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था को ''बेहद गंभीर खतरा'' है।

मौजूदा संकट से दुनिया का कोई भी देश अछूता नहीं रहेगा। इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति व्यवधान ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में नेशनल प्रेस क्लब को संबोधित करते हुए बिरोल ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान पैदा हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे सामान्यत: दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, वहां से आवाजाही बेहद कम हो गई है। लगभग दो करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी मार्ग से ट्रांजिट होते हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय का दावा है कि नेविगेशन जारी है और वे समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों का सम्मान करते हैं।

बिरोल ने इस संकट की तुलना 1970 के दशक के दो बड़े तेल संकटों और 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए गैस संकट से की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति का संयुक्त प्रभाव इन सभी संकटों से कहीं अधिक विनाशकारी है।

तेल की खपत बचाने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' की सलाह

बचाव के लिए आइईए के महत्वपूर्ण सुझाव संकट के आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए आइईए ने सरकारों और नागरिकों के लिए 'डिमांड-साइड' यानी मांग में कटौती के सुझाव दिए हैं। जहां संभव हो, तेल की खपत बचाने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता दें। हवाई यात्रा से बचने और एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाने की सलाह दी गई है।

ऊर्जा संपत्तियों को भारी नुकसान रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की वजह से नौ देशों में 40 से अधिक तेल और गैस बुनियादी ढांचे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बिरोल ने स्पष्ट किया कि यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकला, तो ऊर्जा बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम और भी भयावह होंगे।

नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र को कोई नुकसान नहीं : आइएईए

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने स्पष्ट किया है कि इजरायल के नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र (डिमोना) को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है। वियना में जारी एक बयान में एजेंसी ने बताया कि उन्हें मिसाइल हमले की खबरों के बाद वहां किसी भी क्षति या असामान्य रेडिएशन का संकेत नहीं मिला है।

आइएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों से अत्यधिक सैन्य संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से परमाणु सुविधाओं के आसपास सुरक्षा बनाए रखने पर जोर दिया ताकि किसी भी संभावित परमाणु खतरे को टाला जा सके।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)