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'एक बीयर तैयार रखना...' जब एक फुटबॉल मैच की वजह से क्रैश हुआ था प्लेन, गई थी 104 लोगों की जान

Published: Thu, 08 Jan 2026 04:05 PM (IST)

7 जनवरी 1972 को इबेरिया एयरलाइंस की फ्लाइट 602 इबीसा के पास एक पहाड़ से टकरा गई, जिससे उसमें सवार ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर कभी एविएशन सेक्टर के काले अध्याय की चर्चा होगी ऐसे में इबेरिया एयरलाइंस का जिक्र सबसे पहले होगा।

7 जनवरी साल 1972 की वो घटना जिसने सैकड़ों लोगों की जान ले ली। आइये जानते हैं इबेरिया एयरलाइंस की उस उड़ान में क्या हुआ था?

7 जनवरी, 1972 को इबेरिया एयरलाइंस की फ्लाइट 602 लैंडिंग से कुछ ही देर पहले एक पहाड़ से टकरा गई, जिससे उसमें सवार सभी 104 लोगों की मौत हो गई।

यह फ्लाइट वालेंसिया से बैलेरिक द्वीप इबीसा जा रही थी, जिसमें 98 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे। इस विमान में सवार कई नागरिक छुट्टियों से घर लौट रहे थे।

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(इबेरिया एयरलाइंस का  602 विमान, फोटो- सोशल मीडिया)

1972 को इबेरिया फ्लाइट 602 दुर्घटनाग्रस्त 

विमान को 37 साल के कैप्टन जोस लुइस बैलेस्टर सेपुल्वेडा उड़ा रहे थे, जो लगभग 7,000 घंटे की उड़ान का अनुभव रखने वाले एक अनुभवी पायलट थे।

उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर जीसस मोंटेसिनोस सांचेज और फ्लाइट इंजीनियर विसेंट रोड्रिगेज मेसा भी मौजूद थे। यह विमान अपने समय का एक आधुनिक जेट माना जाता था, जो दो रोल्स-रॉयस इंजन से चलता था।

दोपहर करीब 12.15 बजे, जब विमान इबिज़ा एयरपोर्ट के पास पहुंचा, तो कैप्टन सेपुलवेडा ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क करके 5,500 फीट नीचे आने की रिक्वेस्ट की।

क्लीयरेंस मिलने के बाद उन्होंने कैजुअली एक फुटबॉल मैच के बारे में अपडेट पूछा और कंट्रोलर्स से मजाक में यह भी कहा कि उनके आने पर एक बीयर तैयार रखना।

 
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(हादसे के बाद इबेरिया एयरलाइंस का  602 विमान, फोटो- सोशल मीडिया)

विमान में सवार सभी 104 लोगों की दुखद मौत हुई

जांचकर्ताओं ने बाद में पाया कि इस बातचीत के दौरान, क्रू ने एयरक्राफ्ट को रनवे 7 की तरफ मोड़ दिया और मैच के बारे में बात करते रहे।

प्लेन अपनी तय ऊंचाई से नीचे उतरने लगा, लेकिन क्रू को ऊंचाई में तेजी से हो रही कमी का तब तक पता नहीं चला जब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कुछ सेकंड बाद, विमान अतालायासा पहाड़ से उसकी चोटी के ठीक नीचे टकरा गया। धमाका इतना ज़ोरदार था कि विमान टक्कर से ही पूरी तरह तबाह हो गया और कोई भी जिंदा नहीं बाख पाया।

आधिकारिक जांच में यह नतीजा निकला कि यह हादसा इंसानी गलती की वजह से हुआ था, जिसमें कैप्टन द्वारा न्यूनतम सुरक्षित ऊंचाई बनाए रखने में नाकाम रहने की बात कही गई थी।