10 साल में 10 गुना बढ़ी हूती विद्रोहियों की सैन्य ताकत, सऊदी से इजरायल तक बढ़ा खतरा
यमन के हूती विद्रोही एक दशक के हमलों के बावजूद कमजोर नहीं बल्कि ताकतवर बनकर उभरे हैं, जिससे लाल सागर ...और पढ़ें

हूती विद्रोही एक दशक के हमलों के बाद भी ताकतवर बने

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, काहिरा। यमन के ज्यादातर हिस्से पर काबिज हूती विद्रोहियों ने पिछले एक दशक के दौरान कई बार सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल के भीषण हमलों का सामना किया है, लेकिन इस सशस्त्र संगठन के हालिया कदमों से जाहिर होता है कि वह इन हमलों से कमजोर नहीं बल्कि ताकतवर बनकर उभरा है।
उसने इस समय सऊदी अरब की नाक में दम कर रखा है। ईरान समर्थित हूती के हमलों के चलते लाल सागर के रास्ते तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति पहले से ही बाधित है।
हूती के लड़ाके सऊदी तेल संयंत्रों को निशाना बना रहे हैं। उनका यमन में बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीक के पेरिम द्वीप पर कब्जा हो गया है। हूती हमलों से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया है।
इसका असर वैश्विक बाजारों में देखने को मिल रहा है। हूती को बढ़त मिलने का जो सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है, वह यह है कि उसने ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों को अपना गढ़ बना रखा है।
हूती विद्रोही हमलों के बाद भी ताकतवर बने
इन दुर्गम इलाकों में हूती के लड़ाके अपने सैन्य बुनियादी ढांचों को बढ़ाने के साथ ही प्रमुख तेल संयंत्रों और महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों को खतरे में डाल सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान लेबनान और इराक में मौजूद अपने सहयोगियों के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण और उन्नत हथियार करता है। इसके साथ ही हूती की कट्टरपंथी विचारधारा भी काम करती है।
न्यूयार्क स्थित रणनीतिक सलाहकार फर्म होराइजन एंगेज के अनुसंधान प्रमुख माइकल नाइट्स ने कहा, 'वे ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों में सबसे प्रतिबद्ध और सबसे आक्रामक हैं।
ईरान ने इन्हें बहुत तेजी से तैयार किया है। जिन मामलों में हिजबुल्ला को महारत हासिल करने में 20 वर्ष लग गए, उन्हें हूती ने महज पांच वर्ष में हासिल कर लिया।
घातक हथियारों से सुसज्जित हूती
हूती विद्रोहियों के पास बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन समेत कई तरह के घातक हथियार हैं, जिनमें से कई ईरानी माडलों के समान हैं। ये हथियार खाड़ी देशों और इजरायल तक मार करने में सक्षम हैं।
उन्होंने लाल सागर में जहाजों पर हमला करने के लिए उन्नत एंटी-शिप मिसाइलों और नौसैनिक ड्रोन का भी उपयोग किया है। इन हमलों से यह महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग खतरे में पड़ गया है। हालांकि ईरान हूती विद्रोहियों को हथियार देने से इन्कार करता है।
हूती के पास हैं साढ़े तीन लाख लड़ाके
2024 में यूएन विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में हूती, ईरान और उसके अन्य सहयोगियों के बीच गहरे सैन्य जुड़ाव की बात कही थी। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2024 तक हूती ने करीब साढ़े तीन लाख लड़ाकों की भर्ती की है।
2015 में उसके पास केवल 30 हजार लड़ाके थे। 2015 में सऊदी अरब ने हूती के खिलाफ यमन के गृहयुद्ध में दखल दिया था और समुद्री नाकेबंदी की थी। हूती अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी अरब में तेल और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं।
