विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जेन-जी रेगेल्ट... जर्मनी में हैलोवीन की वेशभूषा में लोगों का अनोखा विरोध प्रदर्शन

Published: Sun, 01 Nov 2026 11:33 AM (IST)

जर्मनी में Gen Z का विद्रोह... हैलोवीन की आड़ में महंगाई और सैन्य नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा में बदला गया, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

जर्मनी में GenZ Regelt विरोध प्रदर्शन।

जर्मनी में GenZ Regelt विरोध प्रदर्शन।

HighLights

  1. Gen Z रेगेल्ट अभियान के तहत जर्मनी में युवा प्रदर्शन।

  2. महंगाई, शिक्षा बजट कटौती, सैन्य योजनाएं मुख्य मुद्दे।

  3. शांतिपूर्ण प्रदर्शन शाम को हिंसा, आगजनी में बदले।

डिजिटल डेस्क, बर्लिन। जर्मनी के 34 से अधिक शहरों जैसे कि बर्लिन, फ्रैकफर्च, म्यूनिख और कोलोन में शनिवार को हजारों युवा सड़कों पर उतरे। Gen Z रेगेल्ट यानी Gen Z अब कमान संभालेगी नामक इस युवा अभियान के तहत आयोजित इन प्रदर्शनों का मकसद बढ़ती महंगाई, शिक्षा के बजट में कटौती और सेना को मजबूत करने की सरकारी योजनाओं का विरोध करना था।

बता दें कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब देश में 'हैलोवीन' का जश्न भी मनाया जा रहा था, लेकिन दिन ढलते-ढलते शांतिपूर्ण दिखने वाला यह आंदोलन कई जगहों पर भीषण हिंसा और आगजनी में बदल गया।

_GenZ regelt_ protests in Germany

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और नाराजगी की वजह क्या है?

जर्मनी के युवा आज भारी आर्थिक और मानसिक दबाव में हैं। उनके गुस्से और प्रदर्शन की मुख्य वजहें हैं:-

महंगाई और बजट कटौती- देश की सुस्त अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के बीच सरकार द्वारा शिक्षा, स्कूलों और विश्वविद्यालयों के बजट में कटौती करना युवाओं को नागवार गुजरा है।

सैन्य खर्च और अनिवार्य सैन्य सेवा- युवा सरकार की उस योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं जिसके तहत सैन्य बलों की संख्या बढ़ाने और अनिवार्य सैन्य सेवा को दोबारा लाने की बात की जा रही है।

भविष्य की चिंता- देश की बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच कामकाजी युवाओं पर टैक्स और आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटीज की खस्ता हालत पर एक छात्र ने तंज कसते हुए कहा कि जब हम यूनिवर्सिटी के कमरों के अंदर जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे किसी खंडहर में आ गए हों।

_GenZ regelt_ protests in Germany (3)

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कैसे हिंसक झड़पों में बदला?

इस बात को ऐसे समझिए कि दिन के समय तो प्रदर्शन काफी हद तक शांत रहे, लेकिन शाम होते ही फ्रैंकफर्ट, बर्लिन, हैम्बर्ग और कोलोन जैसे बड़े शहरों में हालात बेकाबू हो गए। फ्रैंकफर्ट में नकाबपोश उपद्रवियों ने कई दुकानों और एक गन स्टोर के शीशे तोड़कर लूटपाट की। परफ्यूम स्टोर और ट्रेनर शॉप को भी निशाना बनाया गया।

पुलिस पर हमले की भी खबरें

इतना ही नहीं, मीडिया रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि उग्र भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों और आपातकालीन सेवाओं पर पत्थर, आतिशबाजी और पेट्रोल बम फेंके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैंनन और पेपर स्प्रे का इस्तेमाल करना पड़ा।

पुलिस बोली- चरमपंथी ताकतों ने घुसपैठ की

प्रशासन और स्थानीय मंत्रियों ने इस हिंसा के लिए बाहरी और चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। हेसे राज्य के आंतरिक मंत्री रोमन पोसेक ने कहा कि फ्रैंकफर्ट के प्रदर्शनों में करीब 100 कट्टर वामपंथी घुसपैठ कर गए थे, जिन्होंने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसा में बदल दिया।

हालांकि इससे पहले जर्मन अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि फ्रांस में हुए दंगों की तर्ज पर जर्मनी में भी अति-वामपंथी और विदेशी चरमपंथी समूह माहौल बिगाड़ने की फिराक में हैं।

_GenZ regelt_ protests in Germany (1)

Gen Z रेगेल्ट के आयोजक ने किया किनारा

उधर, Gen Z रेगेल्ट आंदोलन के आयोजकों ने हिंसा से पूरी तरह किनारा कर लिया है। उनका कहना है कि हमारे आंदोलनों में किसी भी तरह के चरमपंथी समूहों, नस्लवाद और नफरत भरे भाषणों के लिए कोई जगह नहीं है।

उम्मीद से कम रही भीड़, लेकिन नेतृत्व पर भी उठे सवाल

अच्छा गौर करने वाली बात यह है कि आयोजकों को शुरुआत में करीब 1.80 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद थी, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में लगभग 120000 लोग ही इसमें शामिल हो पाए।

इस आंदोलन को पूरी तरह छात्र-नेतृत्व वाला बताने पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जर्मनी के राष्ट्रीय छात्र संगठन (BSK) ने इस अभियान से खुद को अलग कर लिया है और 20 नवंबर को एक अलग विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिससे यह साफ होता है कि युवाओं के मुद्दों को उठाने के तरीकों को लेकर खुद उनके बीच मतभेद हैं।

_GenZ regelt_ protests in Germany (4)

अब इस प्रदर्शन के मायने भी समझिए

गौरतलब है कि जर्मनी में Gen Z का यह सड़क पर उतरना यूरोप के सबसे बड़े आर्थिक संकट और युवा पीढ़ी के असंतोष का एक बड़ा संकेत है। सर्बिया और फ्रांस के बाद अब जर्मनी के युवा भी यह संदेश दे रहे हैं कि वे अपनी अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

हालांकि, जब तक ऐसे जन-आंदोलनों में असामाजिक तत्व और चरमपंथी घुसपैठ कर इन्हें हिंसा और लूटपाट का जरिया बनाते रहेंगे, तब तक युवाओं की असली और जायज मांगें कहीं पीछे छूट जाएंगी और अराजकता हावी हो जाएगी। दूसरी तरफ चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सरकार के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि वह युवाओं की इन चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।