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न शिक्षक, न किताबें और जर्जर कक्षाएं.. स्कूलों में प्रदर्शन के बीच फ्रांसीसी छात्रों ने की आगजनी; पुलिस के साथ झड़प

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:24 AM (IST)

फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षा के लिए धन की कमी को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच ...और पढ़ें

स्कूलों में प्रदर्शन के बीच फ्रांसीसी छात्रों ने की आगजनी(फोटो: रॉयटर्स)

स्कूलों में प्रदर्शन के बीच फ्रांसीसी छात्रों ने की आगजनी(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, पेरिस। फ्रांस में स्कूलों की स्थिति और शिक्षा के लिए धन की कमी को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को कई शहरों में हाईस्कूल छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। शिक्षक यूनियनों ने भी हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

पूर्वी शहर स्ट्रासबर्ग में सड़कों पर आंसू गैस छोड़ी गई, जबकि दक्षिणी मार्सेई में पुलिस की ओर आंसू गैस के गोले दागे गए। पश्चिमी रेन्न में कूड़ेदानों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आईं। पेरिस के बाहरी इलाके पैंटिन में प्रदर्शनकारियों ने बाड़ समेत कई सामानों में आग लगा दी और पुलिस पर हमले किए।

गुरुवार की सरकारी बैठक के बाद प्रधानमंत्री के करीबी एक सूत्र ने कहा कि प्रदर्शन अब हिंसा में बदल गया है। कानून मंत्री जेराल्ड दारमैनिन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में बाहरी लोगों ने हस्तक्षेप किया है।

French students Protest (2)

क्या है मामला?

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और लचर स्कूल सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर हाई स्कूल छात्रों का आंदोलन अचानक उग्र हो गया है। शुक्रवार को देशभर के कई शहरों में नए सिरे से हिंसक झड़पें देखने को मिलीं, जहां छात्रों ने जगह-जगह आगजनी की और सुरक्षाबलों पर पत्थर व अन्य वस्तुएं फेंकी।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। सरकार ने छात्रों के अपनी शिकायतें रखने के अधिकार का समर्थन किया है, लेकिन इस दौरान पुलिसकर्मियों पर किए गए हमलों और बर्बर हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है।

500 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई ठप

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश के 3,700 हाई स्कूलों में से कम से कम 564 स्कूलों में पठन-पाठन गंभीर रूप से बाधित हुआ है, जबकि लगभग 400 स्कूलों को पूरी तरह बंद करना पड़ा।

सितंबर में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैल चुका है। सीनियर कक्षाओं के छात्र लगातार स्कूल परिसरों के प्रवेश द्वारों की घेराबंदी कर रहे हैं और प्रशासनिक कार्यों को बाधित कर रहे हैं।

france student protest

क्या है छात्रों की शिकायतें?

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी पढ़ाई के घंटे जरूरत से ज्यादा लंबे हैं और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। अत्यधिक गर्म कक्षाओं, शिक्षकों की लगातार अनुपस्थिति और अध्ययन सामग्री के अभाव को लेकर वे बेहद परेशान हैं।

मध्य पेरिस के तुर्गोत हाई स्कूल के बाहर 15 वर्षीय छात्र साइमन ने बताया कि उनके स्कूल में पूरे एक साल तक साइंस का कोई शिक्षक नहीं था और पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उसने यह भी कहा कि उपनगरीय इलाकों के स्कूलों की स्थिति तो और भी दयनीय है।

कई शहरों में तीखी झड़पें

पश्चिमी शहर ब्रेस्ट में पुलिस ने केरीशेन हाई स्कूल परिसर में आंसू गैस का इस्तेमाल किया जब छात्रों ने सुरक्षा बलों पर चीजें फेंकना शुरू कर दिया। उधर पूर्वी शहर बेलफोर्ट से सामने आए एक वीडियो में युवकों के समूह द्वारा एक अकेले पुलिसकर्मी को घेरकर जमीन पर गिराने और बेरहमी से लात-घूंसों से पीटने का मामला सामने आया।

गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इसे असहनीय हिंसा करार दिया, जिसके बाद एक 17 वर्षीय छात्र को हिरासत में लिया गया। वहीं पेरिस के दो हाई स्कूलों के मुख्य द्वारों पर आग लगा दी गई जिसे बुझाने के लिए दमकल विभाग को मोर्चा संभालना पड़ा।

टूलूज़ में आंसू गैस के प्रभाव से बचने के लिए छात्र आंखों में दवा डालते दिखे, जबकि पेरिस के उत्तरी क्षेत्र ऑबरविलियर्स में पुलिस को लाठी और ढालों का इस्तेमाल करना पड़ा। दूसरी ओर छात्रों ने भी पुलिस पर अनावश्यक बल प्रयोग और बर्बरता का आरोप लगाया है, जिसको लेकर तीन मामलों में विभागीय जांच शुरू की गई है।

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हिंसक समूहों की गिरफ्त में आंदोलन: शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री एडुआर्ड जेफ्रे ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि छात्रों के इस आंदोलन को अति-हिंसक उपद्रवी समूहों ने बंधक बना लिया है। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की शुरुआत से अब तक 40 प्राचार्यों समेत कम से कम 65 स्कूल कर्मचारी और लगभग 170 छात्र घायल हो चुके हैं, जबकि 100 से अधिक स्कूलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों को सड़कों पर उतरने से रोकने की भावुक अपील की ताकि उनकी जान को खतरे से बचाया जा सके।

माता-पिता से होगी नुकसान की भरपाई

न्याय मंत्री जेराल्ड डर्मैनिन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनों के दौरान नाबालिगों द्वारा पहुंचाई गई संपत्ति की क्षति के लिए उनके अभिभावकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और क्षतिपूर्ति की रकम उन्हीं से वसूली जाएगी।

उन्होंने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 90 प्रतिशत नाबालिग हैं। फ्रांस में लगभग छह महीने बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले इस आंदोलन ने बड़ा सियासी रूप ले लिया है।

सरकार ने वामपंथी दल फ्रांस अनबोव्ड पर पर्दे के पीछे से इस आंदोलन को हवा देने का आरोप लगाया है, जिसके नेता ज्यां-ल्यूक मेलेंशॉ राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार हैं।

दूसरी ओर, वामपंथी नेताओं ने सरकार के इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला षड्यंत्र करार दिया है।

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