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'तुरंत भेज दिए थे फाइटर जेट', फ्लाईदुबई हमले पर इजराइल ने किए कई चौंकाने वाले खुलासे

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:54 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 01 Oct 2026 07:21 PM (GMT+05:30)

इजराइल के राजदूत ने खुलासा किया कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के को-पायलट ने उसे ...और पढ़ें

इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट रवाना किए, पर कार्रवाई नहीं हुई।

इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट रवाना किए, पर कार्रवाई नहीं हुई।

HighLights

  1. फ्लाईदुबई को-पायलट ने प्लेन क्रैश करने का प्रयास किया।

  2. इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट रवाना किए, पर कार्रवाई नहीं हुई।

  3. भारतीय कैप्टन मछार ने यात्रियों संग प्लेन बचाया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने बताया कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट के को-पायलट ने कथित तौर पर प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की और इमरजेंसी सिग्नल भेजे, इसके बाद इजराइल ने अपने फाइटर जेट्स तुरंत रवाना कर दिए, लेकिन उन्हें कोई कार्रवाई नहीं करनी पड़ी क्योंकि यात्रियों और क्रू ने प्लेन पर दोबारा कंट्रोल पा लिया और उसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतार लिया।

खतरे की तुरंत की गई थी जांच

न्यूज एजेंसी PTI को अजार ने बताया कि प्लेन से इमरजेंसी की सूचना मिलने के बाद इजराइल के सिविल एविएशन अधिकारियों, एयर फोर्स और राजनीतिक नेतृत्व को तुरंत अलर्ट कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि इजराइल के छोटे भौगोलिक आकार के कारण इस स्थिति को संभावित खतरे के तौर पर तुरंत आंका गया था। अजार ने कहा, 'फाइटर जेट्स को तुरंत हवा में भेजा गया लेकिन राहत की बात यह रही कि उन्हें कोई कार्रवाई नहीं करनी पड़ी।'

इजराइल के राजदूत ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर यात्री और क्रू प्लेन पर दोबारा कंट्रोल पाने में नाकाम रहते, तो ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नेतन्याहू को तुरंत कोई फैसला लेना पड़ता।

उन्होंने मामले को ज्यादा विस्तार में नहीं खींचते हुए कहा, 'उन्होंने स्थिति का आकलन किया था और अगर पायलट, क्रू मेंबर और यात्री प्लेन पर कंट्रोल नहीं कर पाते, तब इजराइल के प्रधानमंत्री को तुरंत कोई फैसला लेना पड़ता, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती।'

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 'फ्लाईदुबई' की फ्लाइट FZ1073 से जुड़ी है, जो 174 यात्रियों (जिनमें 27 बच्चे भी शामिल थे) के साथ दुबई से तेल अवीव जा रही थी। बताया जाता है कि सऊदी अरब के तबुक में प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुल अजीज एयरपोर्ट की ओर मुड़ने से पहले प्लेन तेजी से नीचे आया था।

भारतीय कैप्टन और इजराइली यात्रियों ने बड़ी दुर्घटना को टालने में मदद की

अजार ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार की तारीफ करते हुए कहा, 'को-पायलट के हमले के मछार ने कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे यात्री बीच-बचाव कर सके और प्लेन को क्रैश होने से बचा सके।'

राजदूत ने कहा कि मछार को उनके काम के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग, संसद के स्पीकर और पूरे इजराइल के लोगों से तारीफ मिली है।

घटना के पीछे का मकसद अभी साफ नहीं, जांच जारी

राजदूत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और अधिकारी अभी तक कथित हमले के पीछे का मकसद पता नहीं लगा पाए हैं। अजार ने कहा, 'हम अभी बहुत शुरुआती दौर में हैं। मुझे लगता है कि हमलावर से पूछताछ के बाद हमें और जानकारी मिल पाएगी।'

UAE के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल-शम्सी ने घटना की परिस्थितियों, विवरण और मकसद का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या इसका संबंध किसी आतंकवादी गतिविधि से था या इसमें पहले से कोई योजना बनाई गई थी।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि घटना में ईरान का कोई हाथ था या नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि इजराइल जांच में शामिल हो सकता है।

राजदूत ने घटना के समय का जिक्र किया

अजार ने घटना पर चर्चा करते हुए इसके समय का जिक्र किया, लेकिन कथित हमले और क्षेत्र की व्यापक सुरक्षा के बीच कोई संबंध नहीं बताया।

उन्होंने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि यह समय बहुत संवेदनशील है। इज़राइल में चुनाव में बस कुछ ही हफ्ते बचे हैं।'

राजदूत ने कहा कि 7 अक्तूबर को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों की तीसरी बरसी है उससे पहले इस तरह की घटना इस समय पर होना बड़ी जांच का विषय बन गया है।

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