युद्ध समाप्ति के बाद बदल जाएगी यूक्रेन की सुरक्षा तस्वीर, यूरोप में बनाई बहुराष्ट्रीय सेना की योजना; बढ़ेगी पुतिन की चिंता
यूरोप यूक्रेन युद्ध के बाद अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है, जिसके तहत 11 देशों के 2,800 सैनिक पोलैंड में 'कोएलिजिया 26.2' सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

यूरोप में यूक्रेन की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय सेना की योजना
HighLights
पोलैंड में 11 देशों का बड़ा सैन्य अभ्यास 'कोएलिजिया 26.2'।
यूक्रेन की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय सेना की तैनाती का पूर्वाभ्यास।
रूस ने यूरोपीय देशों को यूक्रेन में सेना न भेजने की चेतावनी दी।
डिजिटल डेस्क, कीव। यूरोप, यूक्रेन के युद्ध के बाद सुरक्षा के लिए अपनी तैयारियों को तेजी से मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में 11 देशों के 2,800 सैनिक पोलैंड में एक बड़े सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेंगे। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भविष्य में रूस की ओर से होने वाले किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए बहुराष्ट्रीय सैनिकों की तैनाती का पूर्वाभ्यास करना है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब यूरोपीय देश कीव के लिए सुरक्षा गारंटियों को ठोस रूप देने में जुटे हैं, ताकि युद्ध की समाप्ति के बाद रूस को दोबारा आक्रमण करने से रोका जा सके।
सैन्य अभ्यास की रूपरेखा
डिफेंस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 'कोएलिजिया 26.2' नाम का यह सैन्य अभ्यास 9 से 22 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। ब्रिटेन और फ्रांस के संयुक्त नेतृत्व में होने वाले इस आयोजन में 11 देशों के सैनिक अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह परखना है कि युद्धविराम के बाद यूक्रेन की सहायता के लिए एक बहुराष्ट्रीय सेना किस प्रकार व्यावहारिक रूप से काम कर सकती है।
इस युद्धाभ्यास में थल, वायु और समुद्री, तीनों क्षेत्रों के अभियान शामिल हैं। इसमें सैनिकों की तीव्र आवाजाही, लॉजिस्टिक तालमेल, सेना की सुरक्षा और कमांड ढांचे को एकीकृत करना शामिल है।
ब्रिटेन इस अभ्यास में अपने आरएएफ टाइफून लड़ाकू विमानों और वॉयजर एरियल रिफ्यूलिंग विमानों के साथ हिस्सा ले रहा है। वहीं, तुर्की समुद्री अभियानों की जिम्मेदारी संभाल रहा है, जिसमें काला सागर से बारूदी सुरंगों को हटाना भी शामिल है। पोलैंड इस बड़े आयोजन की मेजबानी करते हुए सभी आवश्यक सैन्य और ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
जेलेंस्की की सुरक्षा की मांग
यूक्रेन के दृष्टिकोण से, यह प्रस्तावित तैनाती रूस के संभावित आक्रमण के खिलाफ दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी हासिल करने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी शांति समझौते के साथ पश्चिमी सहयोगियों की ओर से लिखित और स्पष्ट प्रतिबद्धता होनी चाहिए।
एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने स्पष्ट सवाल उठाया था कि यदि रूस दोबारा हमला करता है, तो कौन क्या करेगा, किस साधन से करेगा और कब कदम उठाएगा। यूरोपीय नेताओं के बीच भी यह मुद्दा शीर्ष पर बना हुआ है।
पेरिस में कोएलिशन ऑफ द विलिंग की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश नेतृत्व ने सुरक्षा गारंटी के एक व्यापक ढांचे का समर्थन किया था। इसमें बहुराष्ट्रीय सेना की मौजूदगी, निरंतर सैन्य सहायता और रूस के आक्रामक रुख का जवाब देने का वादा शामिल है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों का मानना है कि यह गारंटी इसलिए अनिवार्य है ताकि कोई भी भविष्य का शांति समझौता यूक्रेन के लिए नया खतरा न बन जाए।
रूस का विरोध और चेतावनी
इस प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय तैनाती का रूस ने कड़ा विरोध किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि वे यूक्रेन में अपने सैनिक न भेजें, भले ही यह युद्ध के बाद की शांति व्यवस्था के तहत ही क्यों न हो।
पुतिन ने स्पष्ट किया कि यदि यूरोपीय सैन्य टुकड़ियों को तैनात किया जाता है, तो इससे रूस के साथ सीधा टकराव पैदा हो जाएगा, जिसका अर्थ रूस के साथ युद्ध होगा।
रूसी विदेश मंत्रालय ने भी यह साफ कर दिया है कि यूक्रेन में तैनात की जाने वाली किसी भी पश्चिमी सैन्य इकाई और उसके बुनियादी ढांचे को रूसी सशस्त्र बल अपने 'वैध सैन्य लक्ष्य' मानेंगे। इन तमाम चेतावनियों के बावजूद, यूरोपीय देश यूक्रेन की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के अपने फैसलों पर आगे बढ़ रहे हैं।
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