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समय से पहले दस्तक देगा अल नीनो, मानसून पर खतरे के साथ भारत में भी दिखेगा असर; मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी

Published: Sat, 16 May 2026 10:10 AM (IST)

अमेरिकी मौसम एजेंसी 'नोआ' के अनुमान के अनुसार, अल नीनो इस साल उम्मीद से पहले मई-जुलाई में दस्तक दे सकता ...और पढ़ें

समय से पहले अल नीनो का आगमन, भारत में सूखे का खतरा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

समय से पहले अल नीनो का आगमन, भारत में सूखे का खतरा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश के बीच मॉनसून पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी मौसम एजेंसी 'नोआ' (NOAA) के लेटेस्ट अनुमानों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ने के कारण अल नीनो उम्मीद से कई हफ्ते पहले मई-जुलाई के दौरान ही दस्तक दे सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के अनुसार, यह खतरनाक मौसमी स्थिति इस बार पूरे मॉनसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जारी अनुमान में यह संभावना 61% थी, जो अब बढ़कर 82% हो गया है।

क्या कह रहा भारतीय मौसम विभाग?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के चीफ मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पिछले महीने जारी इस साल के लिए अपने पहले मानसून पूर्वानुमान में, IMD ने सीजन के दूसरे हिस्से के आसपास अल नीनो के उभरने की संभावना को ध्यान में रखा था। लेकिन ताजा अनुमानों के मुताबिक, अल नीनो के इस समय पूर्व आगमन का सीधा असर मॉनसून की बारिश पर पड़ेगा, जिससे देश में सूखे की स्थिति पैदा होने का खतरा और अधिक बढ़ गया है।

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लंबी अवधि के औसत का 92% यानी सामान्य से कम मॉनसून 2007 में एक नई मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल प्रणाली अपनाने के बाद से राष्ट्रीय मौसम एजेंसी द्वारा मौसमी बारिश का सबसे कम अनुमान था। एजेंसी अगले हफ्ते अपना दूसरा मॉनसून पूर्वानुमान जारी करेगी।

क्या है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक प्राकृतिक विनाशकारी जलवायु घटना है। यह पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असाान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है, जिससे कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है।

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एआई जेनरेटेड तस्वीर

अल नीनो का संबंध भारत से भी है, 1980 के बाद से लगभग 70% अल नीनो घटनाओं के दौरान मानसून सामान्य से कम या कमजोर रहा है, जिसके कारण अक्सर बड़े पैमाने पर सूखा की स्थिति उत्पन्न होती है।

दुनियाभर के मौसम पर पड़ेगा असर

यूरोपीय मौसम एजेंसी (ECMWF) ने इस महीने की शुरुआत में ही चेतावनी दी थी कि 'अल नीनो' मई में ही सक्रिय हो सकता है। अधिकांश मौसम मॉडल्स संकेत दे रहे हैं कि यह इतिहास की सबसे भीषण अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है, जिसका दुनिया भर के मौसम पर गहरा असर पड़ेगा।

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अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (CPC) के अनुसार, इस बात की दो-तिहाई (66%) संभावना है कि यह अल नीनो आगे चलकर एक 'तीव्र' (Strong) रूप ले लेगा। इतना ही नहीं, नवंबर से जनवरी के बीच इसके 'सुपर अल नीनो' में बदलने की आशंका भी 37% तक बनी हुई है।