जिनेवा, एजेंसी। दुनिया में कोरोना महामारी का असर देश के सामाजिक और आर्थिक तानेबाने पर ही नहींं, बल्कि इसका प्रभाव नौनिहालों पर भी पड़ा है। कोरोना प्रतिबंधों के चलते दुनिया के अधिकतर मुल्‍कों में शिक्षण संस्‍थान बंद रहे। इसका असर बच्‍चों की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर पड़ा है। कोरोना महामारी के चलते दुनिया के करीब 15.60 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इनमें से करीब 2.5 करोड़ बच्चे कभी स्कूल नहीं लौट पाएंगे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यह आशंका जताई है। गुटेरस ने सोशल मीडिया पर कहा क‍ि कोरोना काल में दुनिया शिक्षा के संकट से गुजर रही है। कोरोना प्रसार को रोकने के लिए स्कूल बंद हैं। उन्‍होंने कहा कि ऐसे में हमें डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो भविष्य में बच्चों की शिक्षा के काम आए।

60 करोड़ बच्चे नहीं जा सके स्कूल

यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में 60 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा सके। एशिया और प्रशांत क्षेत्र के करीब 50 फीसद देशों में 200 दिनों से स्कूल पूरी तरह से बंद हैं। स्‍कूलों में शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप है। दक्षिण अमेरिका के करीब 18 देशों में भी पूर्ण या आंशिक रूप से स्कूल बंद हैं। पूर्वी और दक्षिण अफ्रीकी देशों में 5 से 18 साल की उम्र के 40 फीसद बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के आठ करोड़ बच्चों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।

14 देशों में सालभर ​​​​​​​बंद रहे अधिकतर स्कूल

यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कोरोना महामारी के चलते मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक दुनिया के 14 देशों में स्कूल बंद रहे। भारत में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते भारत में कठोर प्रतिबंध लगाए गए। भारत में शिक्षण कार्य पूरी तरह से प्रभावित रहा। दुनिया में इस दौरान 16.80 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा सके। इसका सर्वाधिक असर पनामा पर पड़ा। सबसे ज्यादा दिनों तक पनामा में स्कूल बंद रहे। इसके बाद बांग्लादेश का स्थान रहा। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट में यूरोप और उत्तरी अमेरिकी देशों का कोई जिक्र नहीं है।

लर्निंग पासपोर्ट से लेकर रेडियो तक से पढ़ाई

बच्‍चों की शिक्षा न प्रभावित हो इसके लिए स्‍कूलों ने अपने तरीकों से इंतजाम किया है। कोरोना महामारी के चलते कई मुल्‍कों में लर्निंग पासपोर्ट के जरिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। यह प्रोग्राम यूनिसेफ, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और माइक्रोसॉफ्ट ने मिलकर तैयार किया है। इसमें बच्चों को पढ़ाई के लिए ऑनलाइन किताबें, वीडियो उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं, यूनिसेफ ने दुनिया में 100 से अधिक रेडियो लिपियों की पहचान की है। इसके जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

8 से 39 साल के लोगों में से 50 फीसद से भी कम लोगों का पूर्ण टीकाकरण

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक अमेरिका में 18 से 39 साल के लोगों में से 50 फीसद से भी कम लोगों ने कोरोना का पूर्ण टीकाकरण कराया है। इसी तरह 12 से 17 साल की उम्र के 58 फीसद बच्चों ने एक भी टीका नहीं लगाया है। उधर, अमेरिका में 50 साल से अधिक उम्र के दो तिहाई लोग पूर्ण टीकाकरण करा चुके हैं। बच्चों और युवाओं में कम टीकाकरण को लेकर सरकार चिंतित है। सरकार ने इन लोगों को टीकाकरण के प्रेरित करना चाहती है। इसलिए व्हाइट हाउस ने एक टीम बनाई है। इसमें 50 टि्वच स्ट्रीमर, यू ट्यूबर्स, टिकटॉकर्स और 18 साल के पॉप स्टॉर सिंगर ओलिविया रोड्रिगो शामिल है। ये लोग बच्चों और युवाओं को टीकाकरण के लिए ऑनलाइन जागरूक कर रहे है। इनमें 5 हजार से एक लाख तक के फॉलोवर वालों को हर माह 70 हजार रु. दिए जा रहे हैं।

 

Edited By: Ramesh Mishra