बेनगाजी, एएफपी। उत्तरी अफ्रीकी देश लीबिया के दोनों धड़े संघर्ष विराम के लिए राजी हो गए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की युद्धविराम की अपील पर अमल करते हुए जनरल खलीफा हफ्तार ने शनिवार को संघर्ष विराम की घोषणा की थी। लीबिया की सरकार गवर्नमेंट ऑफ नेशनल एकॉर्ड (GNA) के प्रमुख फयाज अल-सराज ने भी इसका स्वागत किया है।

वर्ष 2011 में तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की मौत के बाद से लीबिया में जीएनए और हफ्तार के नेतृत्व वाले विद्रोही धड़े के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा है। रूस और तुर्की के अलावा जर्मनी और इटली भी इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिश में लगे हैं। तेल संपन्न देश में शांति के लिए लीबिया मसले पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष दूत घसन सलामी की अगुआई में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में जल्द ही बड़े सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

बता दें कि लीबिया में दो विरोधी गुटों के बीच जारी खूनी संघर्ष को देखते हुए रूस और तुर्की ने कहा था कि देश में सोमवार तक संघर्ष विराम की घोषणा हो जानी चाहिए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की में उनके समकक्ष रेसेप तैयप एर्दोगन का यह संयुक्त इस्तांबुल में दोनों नेताओं की बैठक के बाद आया।

तुर्की पहुंचे थे रूस के राष्ट्रपति

पुतिन लीबिया के मुद्दे पर एर्दोगन से बातचीत के लिए तुर्की पहुंचे थे। साझा अपील में विरोधी गुटों के बीच राजनीतिक समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की अगुआई में आगे बढ़ने की बात की गई थी। लीबिया में शांति के प्रयास में जुटे यूएन ने इस कदम का स्वागत किया है।

गौरतलब है कि लीबिया में पिछले कई वर्षो से फयाज अल-सिराज के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट ऑफ नेशनल एकॉर्ड (GNA) और जनरल खलीफा हफ्तार की लीबियन नेशनल आर्मी (LNA) के बीच घमासान चल रहा है। पहले गुट को तुर्की का समर्थन है, जबकि दूसरे को रूस का। अब दोनों विरोधी गुटों के समर्थक देशों की इस अपील पर लीबिया में जारी संघर्ष के खत्म करने को राजी हो गए हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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