नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। अपने विशाल आकार और सुख-सुविधाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध विश्व का सबसे बड़ा यात्री विमान बंद होने की कगार पर है। लॉचिंग के वक्त इस विमान को उड़ता महल कहा गया था। इस विमान को लॉच हुए अभी मात्र 11 वर्ष ही हुए हैं और अब इस विशाल विमान के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह बेहद चौंकाने वाली है।

यहां हम बात कर रहे हैं एयरबस के A380 विमान की। एयरबस ने 15 अक्टूबर 2007 को जब पहली बार इस विमान को उतारा तो इसे विमानन उद्योग में एक क्रांतिकारी शुरूआत मानी जा रही थी। जैसे की उम्मीद थी इस विमान ने यात्रियों और विमानन कंपनियों को काफी आकर्षित किया। इस विमान की लोकप्रियता लॉच होने के साथ ही इतनी बढ़ गई थी कि जहां भी यह विमान पहुंचता, इसके साथ सेल्फी लेने वालों की भीड़ जुट जाती। इस विमान की सुख-सुविधाओं ऐसी हैं, जो किसी और यात्री विमान में नहीं हैं।

विशाल आकार और बड़े इंजनों के बावजूद इस विमान में ईंधन का खर्च कम है। जब इस विमान को लॉच किया गया था, तो इसने सारे प्रतिद्वंदियों को मात दे दी थी। इस विमान की लंबाई 72.7 मीटर और ऊंचाई 24 मीटर है, जबकि इसके डैनों का विस्तार 79.8 मीटर तक है। इस वजह से इस विमान के अंदर किसी महल से भी अधिक जगह है। बावजूद, विमानन कंपनियों का इस विमान से मोह भंग हो रहा है। खरीदार न मिलने की वजह से एयरबस ने इस विमान का निर्माण बंद करने की घोषणा कर दी है।

850 यात्रियों की क्षमता
इस विमान को इसके विशाल आकार की वजह से सुपरजम्बो भी कहा जाता है। ये विमान तीन अलग-अलग कैटेगरी में 500 यात्रियों को लग्जरी और आरामदायक हवाई यात्रा करा सकता है। अन्य बड़े लग्जरी विमानों की तुलना में इसकी यात्री क्षमता 100 ज्यादा है। अगर इस विमान को केवल इकोनॉमी क्लास बना दिया जाए तो इसमें 850 यात्री सफर कर सकते हैं। हालांकि, ये विमान लग्जरी और आरामदायक यात्रा के लिए है, लिहाजा इसके डेक और फर्स्ट क्लास सुईट में बिस्तर लगे हुए हैं।

इस विमान में निजी सुईट भी है
A380 विमान के बड़े आकार की वजह से इसमें बड़ी-बड़ी खिड़कियां, ऊंची छत और ऐसा इंजन है जो बिल्कुल आवाज नहीं करता। इसके अंदर इतनी जगह है कि कुछ एयरलाइन कंपनियों ने इसमें शॉवर, लाउंज, ड्यूटी फ्री शॉप और दोनो डेक पर बार आदि भी बना दिए। इसके अलावा यात्रियों को किसी आलीशान होटल की तरह बड़ी-बड़ी खिड़कियों वाले खूबसूरत निजी सुईट में सफर करने का भी विकल्प दिया जाने लगा। इस विमान की लोकप्रियता का ही असर है कि बेहद कीमती होने के बावजूद आज दुनिया भर 160, A380 विमान हैं।

दो मंजिला है विमान
ये विमान दो मंजिल का है। इसके निचले तल पर 12 बंकरनुमा बिस्तर बने हैं, जिसमें विमान के कर्मचारी लंबी फ्लाइट के दौरान आराम कर सकते हैं। इस विमान में पायलट्स के लिए भी बेड लगे हैं।

सिंगापुर एयरलाइंस था पहला खरीदार
सबसे बड़े यात्री विमान A380 की पहली खरीदार सिंगापुर एयरलाइंस थी। उस वक्त एयरलाइंस के लिए इस विशाल विमान को अपने बेड़े में शामिल करना गर्व की बात थी। माना जाता था कि एक बार में ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को ले जाना मुनाफे का सौदा होगा। लिहाजा शुरूआती कुछ वर्षों में एयरलाइंस कंपनियों ने इस विशाल यात्री विमान को लेकर काफी उत्साहित रहीं। हालांकि, जल्द ही इस विमान की खूबी ही इसके लिए समस्या बन गई। विमान इतना बड़ा था कि इसकी सीटें खाली रहने लगीं। ऐसे में इस विमान को उड़ाने में एयरलाइंस कंपनियों को घाटा झेलना पड़ा और कंपनियों ने इसके संचालन को सीमित करना शुरू कर दिया।

चार साल में आने लगी तकनीकी खामियां
2007 में पहले विमान की डिलीवरी के चार साल बाद ही इस विशाल विमान में तकनीकि खामियां नजर आने लगीं। 2011-2012 में A380 विमानों की तकनीकी खामियों की वजहों से कई जगह पर आपात लैडिंग भी करानी पड़ी। क्वांटस, एमिरेट्स और सिंगापुर एयरलाइंस को आपातल लैडिंग की वजह से भी काफी नुकसान झेलना पड़ा। जनवरी 2012 में क्वांटस और सिंगापुर एयरलाइंस ने विमान के डैनों में दरार की शिकायत की। जांच में पता चला कि डैनों में दरार की वजह तकनीकी खामी है। इसमें निर्माण में प्रयोग किए गए मैटेरियल और गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं पायी गई। ऐसे में डैनों में आयी दरार को सही करने में कंपनी को 26.3 करोड़ यूरो (करीब 2054 करोड़ रुपये) खर्च करने पड़े, जो बहुत ज्यादा था।

खामी के बाद रद्द होने लगे सौदे
इस विशाल यात्री विमान में खामियां सामने आने के बाद इसके सौदे रद्द होने लगे। जनवरी-फरवरी 2019 में एयरबस के दो सबसे बड़े खरीदार एमिरेट्स और ऑस्ट्रेलियन एयरलाइन क्वांटस ने A380 विमान के आर्डर रद्द कर दिए। एमिरेट्स ने इस सौदे को रद्द कर इसकी जगह छोटे विमान लेने का सौदा किया, जबकि क्वांटस ने A380 की डील ही निरस्त कर दी। इसी तरह अन्य कंपनियों का भी A380 से मोहभंग होने लगा। इसके बाद एयरबस ने ऐलान किया कि है कि वह 2021 में इसका निर्माण बंद कर देगी।

सब जगह नहीं कर सकता लैंड
ये विमान इतना विशाल है कि ये हर एयरपोर्ट से संचालित नहीं किया जा सकता। ये विमान इतना बड़ा है कि इसके लिए लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर बने हैंगर्स को नए सिरे से संवारना पड़ा। हीथ्रो एयरपोर्ट के हैंगर्स 1950 में बने थे और इनकी ऊंचाई 76 फीट थी, जिन्हें सुपरजम्बो लायक बनाने के लिए 11.5 फीट और बढ़ाना पड़ा था। हैंगर्स की ऊंचाई बढ़ाने में 18 महीने का वक्त लगा। इतना ही नहीं इस विशाल विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए बेहत प्रशिक्षित और कुशल पायलटों की जरूरत होती है।

काफी कर्मचारियों की होती है जरूरत
इस विशाल विमान की जांच और मेंटीनेंस आदि के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त एक बड़ी टीम लगती है। दरअसल, A380 विमान में काफी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसके सभी सिस्टम, केबल और उपकरणों के नेटवर्क की देखरेख के लिए तकनीशियन की जगह कंप्यूटर इंजीनियरों की आवश्यकता होती है। कंप्यूटर इंजीनियर विमान के रडार से लेकर एयर कंडीशनिंग और फ्लाइट नियंत्रण तक पर नजर रखते हैं। इस विशाल विमान से कंपनियों का मोह भंग होने की ये भी अहम वजहें हैं।

इसी तरह बंद हुआ था सुपरसोनिक यात्री विमान कॉनकॉर्ड
एयरबस का A380 विश्व का सबसे बड़ा यात्री विमान है, तो सुपरसोनिक प्लेन कॉनकॉर्ड विश्व का सबसे तेज विमान था। कहा जाता है कि इस सुपरसोनिक विमान की रफ्तार गोली से भी तेज थी। इसका एयरोडायनमिक डिजाइन इसे अलग लुक देता था। आम विमान के मुकाबले सुपरसोनिक विमान लंबी दूरी का सफर आधे से भी कम समय में तय कर लेता था। इस विमान ने 26 नवंबर 2003 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल के ऊपर आखिरी उड़ान भरी थी। इस विमान ने 21 जनवरी 1976 को पहली बार लंदन-बहरीन और पेरिस-रियो रूट पर उड़ान भरी थी। पहले एयर फ्रांस और फिर ब्रिटिश एयरवेज ने सुपरसोनिक विमान को बंद कर दिया था। विमान उद्योग में मंदी और अमेरिकी प्रतिबंध इसके बंद होने की मुख्य वजह है। अमेरिका ने इन विमानों की उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिकी नागरिकों ने इसकी तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण होने पर इसे प्रतिबंधित करने के लिए प्रदर्शन किया था। अपने 27 साल के कार्यकाल में ये विमान केवल एक बार वर्ष 2000 में पेरिस के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। फिलहाल ये सभी विमान संचालन से बाहर हैं। कुछ को संग्राहलयों में रखा गया है।

Posted By: Amit Singh