शेख हसीना के करीबी को फांसी की सजा, जुलाई 2024 हिंसा मामले में विशेष न्यायाधिकरण का फैसला
बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के मामले में अवामी लीग के ...और पढ़ें

हनीफ को जुलाई 2024 हिंसा मामले में मौत की सजा।
HighLights
हनीफ को जुलाई 2024 हिंसा मामले में मौत की सजा।
हसीना के देश छोड़ने का वीडियो बनाने वाले अधिकारी का शव मिला।
पूर्व सरकार गिराने की साजिश के दावे भी सामने आए।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने गुरुवार को अवामी लीग के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के दौरान छह लोगों की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई। न्यायाधिकरण ने जिले के तीन अन्य अवामी लीग नेताओं को भी उम्रकैद की सजा दी। चारों आरोपी फरार हैं।
अदालत ने उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा जब्त करने का आदेश भी दिया। छात्रों के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। हसीना पांच अगस्त, 2024 को देश छोड़कर भारत आ गई थीं। पिछले साल 17 नवंबर को उन्हें और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई गई थी।
हसीना का वीडियो बनाने वाले अधिकारी का शव मिलाबांग्लादेश की तुराग नदी से वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट केएम तहसीफ सौरी का शव बरामद हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह मंगलवार से लापता थे। जेब में मिले आइफोन से उनकी पहचान हुई।
स्वजनों का आरोप है कि हसीना के देश छोड़ने का वीडियो बनाने के बाद से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। वीडियो प्रसारित होने के बाद उन्हें कथित तौर पर वायुसेना से बर्खास्त भी किया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने उनकी मौत और वीडियो के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं की है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। हसीना पांच अगस्त, 2024 को वायुसेना के हेलीकाप्टर से ढाका से निकली थीं और बाद में सी-130जे विमान से भारत पहुंची थीं। उनका विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतरा था।
सरकार गिराने की साजिश के दावे
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने दावा किया है कि हसीना सरकार गिरने से दो दिन पहले छात्र नेताओं और मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात हुई थी। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर ने इस मुलाकात में मदद की थी।
आलम ने फेसबुक पोस्ट में यह भी दावा किया कि सुरक्षा एजेंसियों को बातचीत की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने कथित साजिश का पूरा ब्योरा नहीं दिया और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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