सिडनी, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया ने तकनीकी दिग्गज गूगल और फेसबुक को समाचार सामग्री के बदले देश के मीडिया संस्थानों को भुगतान करने को कहा है। मीडिया कंपनियों के साथ रेवेन्यू पर चर्चा के लिए सरकार तकनीकी कंपनियों को तीन महीने का समय दे सकती है। स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया द्वारा उठाए गए इस कदम को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने फेसबुक और गूगल को मीडिया संस्थानों के साथ रेवेन्यू साझा करने पर बातचीत करने को कहा था, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक अनिवार्य आचार संहिता का मसौदा जारी किया है, जिससे वैश्विक डिजिटल कंपनियों को व्यावसायिक मीडिया कंपनियों से ली गई समाचार सामग्री के लिए भुगतान करना होगा।

दुनिया के अन्य देश इस तरह की कोई संहिता बनाने में विफल रहे हैं। मसौदे में कहा गया है कि यदि अमेरिका के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कंपनियों के साथ तीन महीने बाद भी सहमति नहीं बन पाती है, तो पंचाट की नियुक्ति की जाएगी। इसका फैसला बाध्यकारी होगी। मसौदे पर 28 अगस्त तक चर्चा होगी। उसके इसे संसद में पेश किया जाएगा। अगर तकनीकी कंपनियां समझौता तोड़ती हैं, तो उन्हें अपने एक साल के टर्नओवर का 10 फीसद अथवा 10 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 54 करोड़ रुपये) की पेनाल्टी भरनी होगी।

गूगल ने कहा, निवेशकों में चिंता बढ़ेगी

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में गूगल के प्रबंध निदेशक मेल सिल्वा ने कहा कि तैयार किए गए मसौदे में मीडिया संस्थानों को प्रत्येक साल मिलने वाले अरबों क्लिक को नजरअंदाज किया गया है। इस कदम से निवेशकों के बीच यह चिंता भी बढ़ेगी कि सरकार काम करने देने के बजाय हस्तक्षेप करेगी। इस संबंध में फेसबुक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Posted By: Tilak Raj

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