सिडनी, न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस। चीन को लेकर इन दिनों दुनियाभर के देश परेशान हैं। चीन की विस्तारवादी नीति की वजह से वो आर्थिक रूप से कमजोर देशों को लोन देकर और वहां पर अपना कारोबार फैलाकर अपना गुलाम बनाने में लगा हुआ है।

कई देशों को तो अपने सैन्य बल से कब्जे में ले लिया है। तिब्बत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अब चीन की नीतियों से बचने के लिए दूसरे देश अपना रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं और साइबर बचाव के उपाय कर रहे हैं। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया ने एक बड़ी घोषणा की है।

ऑस्ट्रेलिया ने चीन की ओर से किए जा रहे साइबर हमलों से बचाव के लिए 500 साइबर एक्सपर्टों की भर्ती करने की घोषणा की है, इसके अलावा अगले दशक ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए लगभग 100 करोड़ डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है। ये अब तक का किसी देश की ओर से साइबर हमले और डिफेंस पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा। 

दरअसल चीन के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंध भी बहुत बेहतर नहीं रह गए हैं इस वजह से वो अब अपने डिफेंस और साइबर एक्सपर्ट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा निवेश करने जा रहा है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि अब साइबर हमले अधिक हो रहे हैं, इसके अलावा चीन समुद्री रास्ते पर कब्जा करने में लगा हुआ है इस वजह से इन दोनों को मजबूत करने के लिए ये निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना है। साइबर हमले सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चीन की नई पहल से ऑस्ट्रेलिया में हताशा का माहौल बन रहा है। दरअसल खुफिया अधिकारियों ने चीन की जासूसी और तेजी से आक्रामक अभियान के बारे में सूचना दी है जिसको लेकर सरकार चिंतित है। चीन की नीतियां सरकार, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और उद्योगों के लिए खतरा बनती जा रही हैं। 

ऑस्ट्रेलिया पर चीन से हुए हमलों का पूरा विवरण अभी भी छिपा हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने कहा कि कुछ लोग बीजिंग को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं उनसे सावधान रहने की जरूरत है। चीनी हैकर्स सरकार के इशारे पर हैकिंग करके नुकसान पहुंचा रहे हैं जिससे सरकार कमजोर हो। उदाहरण के लिए, पिछले साल जनवरी में हैकर्स ने ऑस्ट्रेलियाई संसद के कंप्यूटर सिस्टम को हैक कर लिया था। एक साल पहले, सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा था कि आमतौर पर चीनी हैकर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरण ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय पर हमलों में तैनात किए गए थे।

एक बात और कही जा रही है कि अब जो उपकरण साइबर हमले से बचाव के लिए तैनात किए जा रहे हैं वो और भी खतरनाक है। इस साल की शुरुआत में एक हमले में, हैकर्स ने ऑस्ट्रेलिया में इंडोनेशियाई दूतावास से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया राज्य में शीर्ष नेता के कार्यालय में एक कर्मचारी सदस्य को एक वर्ड फाइल भेजने के लिए एक समझौता ईमेल खाते का उपयोग किया था।  

अटैचमेंट में एरिया-बॉडी नामक एक अदृश्य साइबरअटैक टूल था, जिसका पहले कभी पता नहीं चला था और इसमें नई क्षमताएं थीं। इसने हैकर्स को दूर बैठे ही कंप्यूटर पर ले जाने, फ़ाइलों की कापी बनाने, उनको डिलीट कर देने और डिवाइस की खोज करने की अनुमति दे दी थी। इजराइल की एक साइबर सुरक्षा कंपनी ने बाद में हैकर्स के एक समूह से जोड़ा, जिसे नाइकॉन कहा जाता है। इस चीनी सेना में खोजा गया है।

ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक नीति संस्थान के प्रमुख पीटर जेनिंग्स (एक पूर्व रक्षा और खुफिया अधिकारी) ने कहा कि बीजिंग ने अन्य देशों पर अपने साइबर हमले और इसके हमलों को करने की गति बढ़ा दी है। वहां के हैकर्स बार-बार साइबर अटैक करके सूचनाओं को चुराने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने के लिए अदृश्य तौर पर ऐसे हमले अधिक किए जा रहे हैं। कई देश एक दूसरे की जासूसी करते हैं मगर जिन देशों के बीच बेहतर संबंध होते हैं वहां ये चीजें देखने को नहीं मिलती हैं। 

दरअसल जब से ऑस्ट्रेलिया ने चीन से फैले कोरोनावायरस प्रकोप की जांच किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से कराने की मांग की उसके बाद से ही चीन उससे नाराज हो गया है। एक बात ये भी सामने आया है कि बीजिंग ने जिस तरह से कोरोनावायरस को हराने के लिए काम किया गया वो भी जांचने वाली चीज है।

अब चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते तनाव ने वहां के व्यापार को भी प्रभावित किया है। चीन ने ऑस्ट्रेलिया से जौ और गोमांस के आयात में कटौती की है। इसके अलावा चीन ने अब ऑस्ट्रेलिया से सामंजस्य बनाने के लिए सार्वजनिक प्रयास भी नहीं किया है। जब दोनों देशों के बीच संबंध तल्ख हो गए तो चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर साइबर हमले के आरोपों को वापस लेने की कोशिश की है। राज्य के मीडिया ने दावा किया है कि बीजिंग ने दो साल पहले एक ऑस्ट्रेलियाई ऑपरेशन को बाधित किया था। 

ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल निदेशालय और ऑस्ट्रेलियाई साइबर सुरक्षा केंद्र देश के डिजिटल नेटवर्क चलाने वाली कंपनियों के साथ हमलों और उनके कनेक्शन के खिलाफ बचाव की अपनी क्षमता का निर्माण करेंगे। रक्षा मंत्री सीनेटर लिंडा रेनॉल्ड्स ने एक बयान में कहा कि साइबर हमलों को रोकने में किया जा रहा निवेश एक तीव्र प्रतिक्रिया बनाने का उद्देश्य है जो साइबर हमलों से बचाएगा। यदि कोई कम्प्यूटर पर हमला करने की कोशिश करेगा तो वो उसे रोका जा सकेगा।

जेनिंग्स ने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में जो निवेश किया जा रहा है वो आवश्यक था। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा में अधिक निवेश की जरूरत है, आने वाले समय में रक्षा और अपराध दोनों बढ़ते रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि यह अंतिम निवेश नहीं होगा।

 

Posted By: Vinay Tiwari

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