नई दिल्ली, एएनआइ। अफगानिस्तान में पश्चिमी प्रांत हेरात की राजधानी में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन पर हुए आतंकी हमले कि अफगानिस्तान विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि तालिबान के इस तरह के हमलों से खतरनाक परिणाम सामने आए हैं। तालिबान द्वारा ऐसी आपराधिक गतिविधियां अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों को गंभीर रूप से खतरे में डाल सकती हैं।

बता दें कि हेरात प्रांत में तालिबानियों के घुसने के कुछ घंटे बाद यूएनएएमए मुख्यालय पर हमला हुआ। यूएनएएमए मुख्यालय के बाहर आतंकियों और अफगान सेना के बीच झड़प भी हुई। हमला किसने किया था यह अभी तक साफ नहीं हुआ है। तालिबान ने अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश में तालिबान इस समय, मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानूनों का व्यापक उल्लंघन, जिसमें नागरिकों की मनमानी हत्या, कैदियों की हत्या, न्यायेतर हत्याएं, महिलाओं को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारना और बुनियादी ढांचे को नष्ट करना और संयुक्त राष्ट्र पर हमला कर रहा है।

विदेश मंत्रालय ने तालिबन पर आरोप लगाया कि वह देश में हिंसा को बढ़ा रहा है और युद्ध अपराध किए जा रहा हैं, जिससे यह साफ होता है कि तालिबान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों से तालिबान को उनके युद्ध अपराधों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गैर-अनुपालन के साथ-साथ निरंतर रक्तपात और युद्ध अपराधों को रोकने के लिए आह्वान किया।

यूएनएएमए मुख्यालय पर हमले का बाद यूएनएएमए ने एक बयान जार कर बताया कि इस हमले में कोई भी कर्मी घायल नहीं हुआ है और ना ही किसी की जान गई है। हमलावर यूएनएएमए मुख्यालय के कैंपस के अंदर नहीं घुस सके थे। मगर हमले में एक अफगान सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई थी।

Edited By: Avinash Rai