काबुल, एजेंसियां। अफगानिस्तान में हेरात, लश्कर गाह और कंधार सहित कई प्रांतीय राजधानियों पर कब्जे को लेकर तालिबान और अफगान सेना के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। हेरात में तालिबान आतंकियों को रोकने के लिए काबुल से अतिरिक्त सेना भेजी गई है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हेरात शहर में चार दिन से तालिबान आतंकी लगातार गोलीबारी कर रहे हैं। वहां अब काबुल से सेना भेजी गई है। सेना के साथ उप गृह मंत्री अब्दुल रहमान रहमान भी हैं। हेरात के पास मालन ब्रिज पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है।

लोगों का पलायन 

हेरात के पश्चिमी क्षेत्र में भी जबर्दस्त संघर्ष चल रहा है। यहां गुजारा और करोख जिलों पर नियंत्रण को लेकर कई दिन से लड़ाई चल रही है। सैकड़ों परिवार हिंसा से बचने के लिए यहां से पलायन कर गए हैं। कंधार में संघर्ष के दौरान मोर्टार हमले में पांच नागरिकों की मौत हो गई।

मारे गए 38 आतंकी

हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह पर कब्जे के लिए तालिबान पूरा दबाव बनाए हुए है। यहां पुलिस मुख्यालय और गवर्नर कार्यालय के पास सेना और तालिबान के बीच गोलीबारी चल रही है। सूत्रों ने बताया कि इस शहर में कई हिस्से तालिबान के कब्जे में आ गए हैं। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यहां 38 आतंकी मारे गए। घटना उस समय हुई, जब तालिबान आतंकी जेल में घुसने का प्रयास कर रहे थे।

गनी ने अमेरिकी सेना को ठहराया जिम्‍मेदार

इधर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश की बिगड़ती स्थिति के लिए अमेरिकी सेना की अचानक वापसी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की छह महीने में स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने की योजना थी। अमेरिका के अचानक निर्णय से इस योजना पर ठीक से अमल नहीं हो सका। गनी ने संसद में दिए भाषण में ये बातें कहीं।

तालिबान को मिल रहा दूसरे आतंकी संगठनों का साथ 

राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि तालिबान तब तक शांति वार्ता की ओर नहीं बढ़ेगा, जब तक खराब स्थिति को सुधारा नहीं जाता। उन्होंने कहा कि तालिबान ने अन्य आतंकी संगठनों से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं। वह महिलाओं और बच्चों को मार रहा है।

रूस और उज्बेकिस्तान का युद्धाभ्यास शुरू

रायटर के अनुसार रूस के 1500 सैनिकों ने उज्बेक सेना के साथ पांच दिन का युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। इसके बाद रूस का अगले सप्ताह ताजिकिस्तान के साथ भी युद्धाभ्यास शुरू होने वाला है।