नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। डेनमार्क में 120 साल पहले समुद्र किनारे लाइट हाउस बनाया गया था। 1990 में जब इस लाइट हाउस को जलाया गया था, उस समय समुद्र से इसकी दूरी 660 फीट थी। अब समुद्र से इसकी दूरी मात्र 20 फीट रह गई है। प्रशासन का कहना है कि यदि इसको अभी यहां से शिफ्ट नहीं किया जाता तो अगले कुछ सालों में समुद्र इसे अपने पानी में समा ले जाता। इसका अस्तित्व ही खत्म हो जाता। इस वजह से अब इसको यहां से शिफ्ट करने की योजना बनाई गई और तकनीकी की मदद से अब समुद्र 260 फीट की दूरी पर शिफ्ट कर दिया गया।

फिर से खोला गया जटलैंड 

डेनमार्क में इस लाइट हाइस को 120 साल पहले बनाया गया था। अब इसे यहां से शिफ्ट करने के बाद फिर से आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। इसे Rubjerg Knude लाइट हाइस के नाम से जाना जाता है। अब इसे समुद्र की सतह से 260 फीट दूर ले जाकर वहां शिफ्ट कर दिया गया। इसे शिफ्ट करने के बाद एग्टवेज के द्धीप पर जटलैंड में फिर से रोशन कर दिया गया। नए तरीके से इसे नीली रोशनी से रोशन किया जा रहा है। नई जगह पर खोले जाने के बाद अब इसे देखने के लिए भी काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

लाइट हाउस को शिफ्ट किए जाने के दौरान देखने वालों की लगी रही भीड़ 

इस ऐतिहासिक इमारत को शिफ्ट करने के लिए जब काम शुरू किया गया तो इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग आसपास जमा थे। वो ये देखना चाह रहे थे कि इसे किस तकनीक से और कैसे यहां से शिफ्ट किया जाएगा। इमारत को शिफ्ट करने के काम में लगे लोगों ने इस इमारत के तीन ओर से एक बेरिकेड लगा रखा था जिससे प्रत्यक्षदर्शी इसके पास न पहुंच सके। लाइट हाउस को जैसे-जैसे शिफ्ट करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा था वैसे-वैसे लोग इसे देखकर खुश हो रहे थे।

पर्यावरण मंत्री ने खर्च किए 5 मिलियन क्रोनर 

डेनमार्क के पर्यावरण मंत्री ली वर्मेलिन ने बताया कि इस लाइट हाउस को शिफ्ट करने के लिए 5 मिलियन क्रोनर खर्च किए हैं। उन्होंने बताया कि ये एक तरह का राष्ट्रीय खजाना है। उन्होंने बताया कि ये लगभग 1000 टन का है, जिस जगह पर ये लाइट हाउस बना हुआ है, उसकी समुद्र से दूरी 60 मीटर (200 फीट) है। ये एक चट्टान पर बना हुआ है। शहर के बिल्ट और होजेरिंग ने भी इसे नई जगह पर बनाने में मदद की। 

म्यूजियम में किया गया तब्दील 

डेनमार्क में समुद्र के किनारे बनाया गया ये लाइट हाउस साल 1968 में बंद कर दिया गया था। उसके बाद इसे एक छोटे म्यूजियम का रूप दे दिया गया। इस म्यूजियम में रेत के बहाव के खिलाफ संरचना के संघर्ष के बारे में एक प्रदर्शनी लगाई गई थी। बाद में इसे बंद कर दिया गया था। दरअसल इस लाइट हाइस के बराबर में दो और भी ऐसी इमारतें थी जो रेत की कटान की वजह से खत्म हो गई। उसके बाद पर्यावरण मंत्रालय ने तय किया कि यदि इसे भी समय रहते यहां से शिफ्ट नहीं किया गया तो ये भी खत्म हो जाएगा।

हर साल 2 लाख 50 हजार लोग देखने आ रहे थे 

इस लाइट हाउस की खासियत ये थी कि अभी भी इसे हर साल लगभग 2 लाख 50 हजार से अधिक लोग देखने के लिए आते थे। जब इसे शिफ्ट करना शुरू किया गया तो 30 मिनट में इसे मात्र 1.4 मीटर की खिसकाया जा सका था। कुछ स्थानीय समाचार चैनलों ने इसका सजीव प्रसारण भी किया था। जिस जगह पर ये लाइट हाउस बना हुआ था उसे लगातार शिफ्टिंग सैंड्स और इरोडिंग कोस्टलाइन के लिए जाना जाता है।

समुद्र किनारे बने चर्च को गिरने से रोकने के लिए कर दिया गया था नष्ट 

साल 2008 में इसी के पास एक चर्च बना हुआ था। इसके पास एक चट्टान पर 1250 में रोमनस्क्यू मर्प चर्च बना हुआ था। इसे ऑस्कर जीतने वाली फिल्म बैबेट्स फीस्ट में सीन के लिए भी चुना गया था। इस फिल्म ने 1987 में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म के लिए ऑस्कर जीता था।  

Posted By: Vinay Tiwari

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